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द्रोपदी ने कई बच्चों को दिया अपने स्नेह का आंचल

Sat, 13 May 2017 10:54 PM IST
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
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द्रोपदी गर्ब्याल - फोटो : amar ujala
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खुद जीवनभर अविवाहित जीवन बिताने वाली द्रोपदी गर्ब्याल ने अपने स्नेह के आंचल से कई बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी। उनमें असली मां का रूप दिखता है। यूपी और उत्तराखंड के कई विद्यालयों में शिक्षक के तौर पर सेवा करते हुए उन्होंने गरीब बालिकाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह लोगों को इस बात के लिए प्रेरित करती रही कि मां यदि शिक्षित हो तो बच्चों में खुद ही अच्छे संस्कार आ जाते हैं। द्रोपदी 1990 में सरकारी सेवा से रिटायर हो गईं। तब से वह नारायणआश्रम की मुख्य ट्रस्टी के तौर पर काम कर रही हैं। नारायणआश्रम में आने वाले साधकों की वह निरंतर सेवा करती रहती हैं।
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द्रोपदी ने ऐसे समय में उच्च शिक्षा हासिल की, जब पहाड़ पर शिक्षा के कोई साधन नहीं थे। पांच दिसंबर 1931 को धारचूला तहसील के गर्ब्यांग में जन्मी द्रोपदी ने प्राथमिक शिक्षा गर्ब्यांग के स्कूल से हासिल की। इंटर की शिक्षा के लिए वह अल्मोड़ा चली गईं। उसके बाद उन्होंने नैनीताल और इलाहाबाद से उच्च शिक्षा ग्रहण की और शिक्षा विभाग में नौकरी शुरू कर दी। द्रोपदी ने कभी भी अविवाहित होने का दर्द नहीं पाला। वह स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे को समान रूप से स्नेह देती और उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इसी उल्लेखनीय योगदान के लिए 1989 में यूपी सरकार ने उत्कृष्ट सेवा के लिए राज्यपाल का पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

द्रोपदी कहती हैं कि कुछ बच्चे परिवार में सही तरह का माहौल न मिल पाने के कारण तनाव में आ जाते हैं। यदि इस कमी को विद्यालय के शिक्षक पूरा कर दें तो किसी भी बच्चे को उसकी मंजिल तक पहुंचाया जा सकता है। उनके पढ़ाए हुए बच्चे आज उच्च पदों पर आसीन हैं। समय-समय पर उनके विद्यार्थी रहे लोग उनसे मिलने के लिए आते रहते हैं। द्रोपदी ने नारायणस्वामी के सानिध्य में आकर आजीवन अविवाहित रहने का फैसला लिया था, लेकिन एक महिला होने के नाते उनकी संवेदनाएं और ज्यादा प्रभावी हो गई।
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पिथौरागढ़ और धारचूला जीजीआईसी में प्रधानाचार्य रहते हुए उन्होंने कई बालिकाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज सभी बालिकाएं बेहतर तरीके से जीवनयापन कर रही हैं। गर्ब्यांग के उपप्रधान गोपाल सिंह गर्ब्याल, रं कल्याण संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल का कहना है कि द्रोपदी शिक्षा और समाज को जीवन समर्पित करने वाली महिला हैं।
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