चंपावत। अब बिना मुहर वाले डॉक्टरों के पर्चे अमान्य होंगे। प्रदेश में झोलाछापों पर नकेल कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग सख्त हो गया है। महानिदेशक के नए आदेश के तहत अब हर डॉक्टर को अपने पर्चे पर नाम, डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर की मुहर लगानी होगी, जिससे असली और नकली डॉक्टरों की पहचान आसानी से हो सकेगी। इसके अनुपालन के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
यह आदेश सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम और चैरिटेबल अस्पतालों पर लागू होगा। ओपीडी पर्चे, डिस्चार्ज समरी, रेफरल लेटर और हर प्रकार के चिकित्सकीय प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर के साथ यह मुहर लगानी होगी।
विभाग के संज्ञान में आया था कि कई अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में डॉक्टर अपनी पहचान स्पष्ट नहीं कर रहे थे जिससे पंजीकृत और अपंजीकृत व्यक्तियों में भेद करना कठिन हो रहा था। इसे जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए यह कदम उठाया गया है।
नियम तोड़ने वाले चिकित्सक या अस्पताल के विरुद्ध क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीएम मनीष कुमार ने सीएमओ को इस आदेश के कड़ाई से पालन के निर्देश दे दिए हैं।