पिथौरागढ़। पहाड़ों पर स्वास्थ्य सेवाएं अजब ही ढर्रे पर चल रही हैं। 65 करोड़ की लागत से बने बेस अस्पताल में डॉक्टरों के 159 पद के सापेक्ष मात्र तीन चिकित्सक तैनात हैं। 20 सामान्य डॉक्टर अनुबंध पर हैं। चिकित्सकों की तैनाती के लिए विभाग ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर भी यहां डॉक्टर नहीं बुला पा रहा है लेकिन तकनीशियनों की नियुक्ति में विभाग ने ऐसी जल्दबाजी दिखाई कि बिना लैब बने ही यहां 11 तकनीशियनों की तैनाती कर दी गई। ऐसे में तकनीशियनों को जिला अस्पताल में संबद्ध करना पड़ा है।
सीमांत जिले की छह लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर जिला मुख्यालय के नजदीक लिंठ्यूड़ा में बेस अस्पताल खोला गया जो अब मेडिकल कॉलेज के अधीन है। लोगों को उम्मीद थी कि बेस अस्पताल का संचालन होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलेगा और मैदानी क्षेत्रों की दौड़ नहीं लगानी होगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। अस्पताल के संचालन के ढाई साल बाद भी यहां पैथोलॉजी लैब अस्तित्व में नहीं आ सकी है।
हैरानी की बात है कि करीब चार महीने पहले यहां आउटसोर्स से 11 लैब तकनीशियनों की तैनाती कर दी गई। लैब न होने से तकनीशियन भी असमंजस में थे कि आखिर जांच कैसे करें। मामला संज्ञान में आया तो सभी तकनीशियनों को जिला अस्पताल में संबद्ध कर जिम्मेदारी निभा दी गई है। बेस अस्पताल में हर रोज 30 से 40 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन लैब न होने से इन्हें रक्त सहित अन्य जांचों के लिए भटकना पड़ रहा है। लैब कब तक अस्तित्व में आएगी इसका किसी को पता नहीं है।
विशेषज्ञों की तैनाती में भी छूट रहे पसीने
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित बेस अस्पताल में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में 159 विशेषज्ञों की नियुक्ति होनी है। करीब दो साल से इसके लिए साक्षात्कार हो रहे हैं। अब तक हुए छह साक्षात्कार के बाद सिर्फ तीन विशेषज्ञों की तैनाती यहां हो सकी है। अन्य विशेषज्ञों की तैनाती में चिकित्सा शिक्षा विभाग के पसीने छूट रहे हैं। बेहतर इलाज के लिए मरीज मैदान की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
कोट
बेस अस्पताल में पैथोलॉजी लैब के भवन का निर्माण हो रहा है। जल्द ही लैब अस्तित्व में आएगी और स्थानीय स्तर पर सभी तरह की जांचें शुरू होंगी। - डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़