भाजपा शासनकाल में 15 अगस्त 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने प्रदेश में जिन चार नए जिलों के गठन का एलान किया था, उनमें डीडीहाट भी शामिल था। इस घोषणा के अनुसार अब तक यहां पर डीएम बैठना चाहिए था, लेकिन इस समय स्थिति यह है कि यहां पर एसडीएम की कुर्सी भी खाली पड़ी है।
बृहस्पतिवार को जब हमने डीडीहाट तहसील की पड़ताल की तो देखा कि सुबह 10 बजे कई लोग एसडीएम के यहां अपनी गुहार लेकर पहुंचे थे, लेकिन एसडीएम की कुर्सी खाली पड़ी थी। लोगों ने सुबह 11 बजे तक इंतजार किया। यहां के एसडीएम जयभारत सिंह का एक सप्ताह पूर्व हरिद्वार स्थानांतरण हो गया था।
उनकी जगह नई तैनाती नहीं हुई। गंगोलीहाट के एसडीएम प्रमोद कुमार को यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, लेकिन उनके पास अपनी तहसील के अलावा बेड़ीनाग और डीडीहाट का भी कार्यभार है। वह बृहस्पतिवार को यहां नहीं आ पाए, जिस कारण कई लोगों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
तहसीलदार पूरन चंद्र पंत सुबह 9.55 बजे अपनी सीट पर बैठ गए। एसडीएम न होने के कारण पूरी तहसील का भार इस समय उनके सिर पर है। प्रशासनिक कामकाज के अलावा उनको अपने कार्यालय से संबंधित काम भी निपटाने पड़ रहे हैं। तहसीलदार के पास थल तहसील का भी अतिरिक्त कार्यभार है। पंत ने कहा कि नए एसडीएम के आने तक इसी तरह व्यवस्था बनानी होगी। कोशिश की जाएगी कि जनता के काम न रुकें।