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Pithoragarh News: जागरूकता अभियानों का शोर, पिथौरागढ़ जिले में फिर भी नहीं रुक रहे बाल विवाह

Fri, 28 Nov 2025 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। देश और प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए तमाम जागरूकता अभियान चल रहे हैं। बाल संरक्षण आयोग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सहित अन्य संस्थाओं का गठन कर इस गंभीर अपराध पर अंकुश लगाने की बात हो रही है। सीमांत जिले में सामने आए बाल विवाह के आंकड़े इन सभी अभियानों और संंबंधित संस्थाओं के दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। बाल अधिकारों के संरक्षण पर लंबे समय से काम कर रही अस्कोट की अर्पण संस्था से मिले आंकड़े डराने और चौंकाने वाले हैं।
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संस्था ने दावा किया है कि एक साल में 451 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। यह मामले संस्था के रिकार्ड में दर्ज भी हैं। एएचटीयू का साफ तौर पर कहना है कि जिले में बाल विवाह के मामले न के बराबर हैं। संस्था के मुताबिक बाल विवाह के इन मामलों में लड़कियों की संख्या अधिक है। संस्था ने खुद आश्चर्य जताया है कि तमाम अभियानों और संस्थाओं के गठन के बाद भी बाल विवाह जैसे गंभीर अपराधों पर सिस्टम अंकुश नहीं लगा पा रहा है। संस्था के मुताबिक ये वह मामले हैं जिनकी सूचना मिली है। संस्था मानती है कि कई ऐसे मामले हैं जिनकी सूचना नहीं मिलती और बाल विवाह अंजाम तक पहुंच जाते हैं। संस्था की यह बात बाल विवाह रोकने के लिए बनाए गए सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। संवाद
धारचूला, कनालीछीना और डीडीहाट में होते थे सबसे अधिक बाल विवाह
संस्था के मुताबिक धारचूला, कनालीछीना और डीडीहाट में सबसे अधिक बाल विवाह होते थे। यह तीनों विकासखंड नेपाल की सीमा से लगे हैं। संस्था की सर्वे में यह बात सामने आई है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इन विकासखंडों के गांवों में 70 प्रतिशत से अधिक बाल विवाह के मामले सामने आए हैं।
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मोबाइल है बाल विवाह का प्रमुख कारण
संस्था की सर्वे में यह बात सामने आई है कि इंटरनेट युग या मोबाइल बाल विवाह का बड़ा कारण है। संस्था के मुताबिक मोबाइल यानि सोशल मीडिया के जरिये बच्चे रास्ता भटक रहे हैं। कच्ची उम्र में ही वह बाल विवाह के लिए प्रेरित हो रहे हैं। नौबत यहां तक पहुंच रही है कि कई मामलों में परिजनों के लिए इस आपराधिक कृत्य में बच्चों का साथ देना मजबूरी बन रहा है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से पता चली भाई-बहनों की उम्र
संस्था के मुताबिक बाल विवाह का पता लगाने के लिए कई स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से बात की। विद्यार्थियों से पूछा गया कि उनके घर में भाई या बहन का विवाह कब होना है। विद्यार्थियों ने जब अपने भाई या बहन के विवाह की बात बताई तो संस्था ने उनसे उनकी उम्र पूछी। संस्था के मुताबिक बाल विवाह तय होने के ऐसे कई मामले हैं जिनकी जानकारी विद्यार्थियों से मिली और इन्हें रुकवाया गया।
कोट
संस्था ने जिले भर में एक साल में 451 बाल विवाह रुकवाए। इतने अधिक मामले सामने आना चिंताजनक है। संस्था बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए गंभीरता से काम कर रही है। बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करने के लिए संस्था जिले में बड़ा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। - रेनू ठाकुर, संस्थापक, अर्पण संस्था, अस्कोट
कोट
जिले में बाल विवाह के मामले न के बराबर हैं। जिन मामलों की सूचना मिलती है वहां पहुंचकर इन्हें रोका जाता है। बाल विवाह रोकने के लिए एएचटीयू गंभीरता से काम कर रही है। - बीसी मासीवाल, प्रभारी, एएचटीयू, पिथौरागढ़
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