पिथौरागढ़। पेयजल पंपिंग योजनाओं की एसआईटी जांच को लेकर लोगों ने आवाज मुखर कर दी है। विभिन्न संगठनों के लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर योजनाओं की जांच नहीं करने पर लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में कलक्ट्रेट पहुंचे लोगों ने कहा कि पिथौरागढ़ नगर और आसपास के गांवों के लिए करोड़ों की योजनाएं बनाई गई हैं। इसके बावजूद लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल पा रहा है। उद्घाटन के समय आंवलाघाट पेयजल पंपिंग योजना से 12 एमएलडी पानी की आपूर्ति का दावा किया गया था जबकि वर्तमान में छह से सात एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। इस परियोजना पर अब तक एक अरब से अधिक की धनराशि व्यय की जा चुकी है। बावजूद इसके पेयजल संकट का समाधान नहीं हो पाया है।
इसके अतिरिक्त घाट पंपिंग योजना से भी पेयजल की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही है। जबकि ऑल वेदर रोड के निर्माण के दौरान पांच करोड़ से भी अधिक की लागत से क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को बदला गया था। पहले इस योजना के तहत तीन एमएलडी की आपूर्ति की जा रही थी लेकिन वर्तमान में इस योजना से क्षमता से बहुत कम पानी मिल रहा है।
लोगों ने अपर जिलाधिकारी शिव प्रसाद बरनवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पेयजल सचिव को ज्ञापन भेजकर दोनों योजनाओं की एसआईटी जांच तय समय सीमा के भीतर करने की मांग उठाई है।
ज्ञापन भेजने वालों में आरटीआई कार्यकर्ता सुबोध बिष्ट, जन मंच के संयोजक भगवान रावत, लक्ष्मी दत्त जोशी, सुनील वर्मा, वीरेंद्र कुमार, जगदीश थापा, अंजू चंद, कमला चंद, मंजू चंद, रेखा चंद, देवकी खड़ायत, कमल सूंठा, सभासद अनिल माहरा आदि शामिल रहे।
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वर्षों से जमे अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाय
पिथौरागढ़। पेयजल योजनाओं की जांच के साथ ही लोगों ने जिला मुख्यालय में जल संस्थान और जल निगम में वर्षों से जमे अधिकारियों, कर्मचारियों का स्थानांतरण करने की मांग भी उठाई है।
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परंपरागत जल स्रोत को बचाने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट पहुंची महिलाएं
- महिलाओं ने कहा-बोरिंग करने से जल स्रोत में कम हो गया है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। रियांसी गांव में स्रोत के ऊपर बोरिंग करने से जल स्रोत में पानी कम हो गया है। ग्रामीणों को जरूरत का पानी नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं ने कलक्ट्रेट पहुंचकर अपर जिलाधिकारी के समक्ष मामला उठाया और परंपरागत जल स्रोत को बचाने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की।
वड्डा क्षेत्र के झौलखेत (रियांसी) गांव से जिला मुख्यालय पहुंची महिलाओं ने कहा कि गांव में 25-30 परिवार रहते हैं। सभी परिवार परंपरागत जल स्रोत से पानी की आपूर्ति करते हैं। एक व्यक्ति ने जल स्रोत के ठीक ऊपर बोरिंग कर दी है। इसके चलते स्रोत का पानी कम हो गया है। ऐसे में उन्हें पानी की आपूर्ति में परेशानी उठानी पड़ रही है। यदि यही स्थिति रही तो जल्दी स्रोत सूख जाएगा। सभी महिलाओं ने अपर जिलाधिकारी से शीघ्र स्रोत के ऊपर की गई बोरिंग को बंद करने की मांग उठाई। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रधान राधिका देवी, प्रेमा, तनुजा खड़ायत, रेखा चंद, कमला चंद, पूनम चंद, देवकी खड़ायत, कमला आदि महिलाएं शामिल थीं।