पिथौरागढ़। जिले की आस्था का प्रतीक सतगढ़ का आठूं पर्व गौरा-महेश्वर विसर्जन के साथ संपन्न हुआ। हिरन चीतल और मां महाकाली पर्व का मुख्य आकर्षण रहे। कलाकारों ने हिरन चीतल का मनमोहक मंचन किया तो मां महाकाली ने अवतरित होकर लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर पिथौरागढ़-धारचूला हाईवे पर सतगढ़ गांव का आठूं पर्व पूरे जिले में प्रसिद्ध है। यह पर्व खतेड़ा, मझेड़ा और सतगढ़ की साझी संस्कृतिक का प्रतीक है। तीनों गांवों में कलाकारों ने आस्था का प्रतीक हिरन का सुंदर मंचन किया।
वहीं बाटकी सतगढ़ में मां महाकाली का मंचन किया गया। लोगों ने मां महाकाली से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद तीनों गांवों से लोकगीतों औ ढोल-नगाड़ों के साथ मां गौरा की प्रतिमा कालसिन मंदिर पहुंचाई गईं यहां इनका विसर्जन किया गया। देवडांगरों ने अवतरित होकर लोगों को मां गौरा को अर्पित किए फल प्रसाद स्वरूप बांटे।
सतगढ़ गांव के आठूं पर्व की हिरन चीतल विशिष्ट पहचान है। हिरन के मंचन के लिए यहां के कलाकारों को देहरादून राजभवन में भी आमंत्रित किया जा चुका है। संवाद
आठूं पर्व की डाक्यूमेंट्री हुई तैयार
पिथौरागढ़। संस्कृति विभाग की टीम ने सतगढ़ गांव के साथ ही खतीगांव पहुंचकर आठूं पर्व की डाक्यूमेंट्री तैयार की। सतगढ़ में हिरन चीतल, मां महाकाली, बैलों की जोड़ी, खेल जबकि खतीगांव में गौरा मां की डाक्यूमेंट्री तैयार की गई। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी अल्मोड़ा डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि पिथौरागढ़ की हिलजाता पूरे प्रदेश में विशिष्ट है। सतगढ़, खतीगांव, देवलथल, कुमौड़ की हिलजात्रा की डाक्यूमेंट्री तैयार कर इस विशिष्ट धरोहर को यूनेस्को की धरोहर में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। टीम में संस्कृति विभाग के जन्मेजय तिवारी सहित अन्य लोग शामिल रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों में मची गौरा महोत्सव की धूम
लोहाघाट (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे जाख जिंडी, सुनुकुरी, निडिल, विविल, डुंगरा लेटी, जमरसों, जुजरी, गंगनौला, नगर से लगे कोलीढेक, बाराकोट ब्लाॅक के नौमाना गांवों की महिलाओं ने सुबह गौरा महेश की प्रतिमा की पूजा अर्चना की।
दोपहर बाद गौरा महोत्सव स्थल पर एकत्रित हुई महिलाओं और पुरुषों ने रानी कुंता जप में बसी इंद्र को करि हालो ध्यान, मांगी हालो पूत को बर, गांधारी अपूती रैछ तैका लगै मांगी दिय पूत, पांडू राजा बोलन लाग्या, सुन कुंता सुन मेरी बात तेरा हैग्या तीन पूत पैदा, कौशल्या सासू तुम बसी रया हम चले बनवास,ओ फूल हजारी को फूल त्वै फूल देवी चढुंना, ए भादों कि खान आछे गौरा आदि मंगल गीतों का गायन किया।
पुरुषों ने भी झोड़े, झुमटों, गौरा धुमारी, चाली का गायन किया। पंडित मदन कलौनी ने पूजा अर्चना संपन्न कराई। देव डांगरों ने क्षेत्र की खुशहाली, स्वस्थ रहने का लोगों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान प्रताप चंद, बृजमोहन, बजीर चंद प्रेम चंद, दुर्गा चंद, जोगाराम, हयात राम, हुकम राम आदि मौजूद रहे।