पिथौरागढ़। वनों में आग लगने का प्रमुख कारण चीड़ का पिरूल सड़क पर जमा है। इन पर चल रहे वाहनों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद सड़कों की निर्माणदायी एजेंसियां कोई ध्यान नहीं दे रहीं हैं।
जिले की विभिन्न सड़कें चीड़ के वनों से होकर गुजरती हैं। इन सड़कों में मार्च के बाद पिरूल गिरने लगता है। चीड़ की पिरूल से जहां वनों में आग लगने की घटनाएं होती हैं, वहीं ओगला-डीडीहाट, कनालीछीना-पीपली समेत कई सड़कों पर बिछी पिरूल में वाहनों के फिसलने का भी खतरा है। पिरूल के कारण दोपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा अधिक है। मोड़ों पर अचानक वाहन सामने आते ही ब्रेक लगाने पर वाहन पलटने का खतरा रहता है।
पिरूल की सफाई न होने से राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध बिष्ट ने निर्माणदायी एजेंसियों से सड़क पर खतरा बने पिरूल की सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माणदायी एजेंसियों को सड़कों के रखरखाव के साथ ही सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए।