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कई पेड़ काटे, कइयों की निकाली छाल

Thu, 14 Jul 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
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थुनेर के पेड़ की कटी शाखा और निकली छाल को दिखाता ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ थुनेर के पेड़ों पर तस्करों की नजर लग गई है। थुनेर का बाटनिकल नाम टैक्सस बकाटा है और इसकी छाल से कैंसर की दवा बनाई जाती है। छह माह पहले भी अमर उजाला ने थुनेर के पेड़ों को पहुंचाए जा रहे नुकसान की खबर छापी थी। ताजा मामले में बताया गया है कि मुनस्यारी से करीब 19 किलोमीटर दूर रारीमैनसिंह टॉप पर स्थित थुनेर के कई पेड़ काटे गए हैं और कई पेड़ों की छाल निकाली गई है। इस कारण कुछ पेड़ सूखने लगे हैं। चार दिन पहले हुई इस घटना से वन विभाग अब तक अनजान बना रहा। कहा जा रहा है कि कुछ जानकार किस्म के तस्कर इस घटना को अंजाम दे रहे होंगे और छाल को बेचने के लिए ले जा रहे होंगे।
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थुनेर को वन विभाग ने अति संरक्षित की श्रेणी में रखा तो है, लेकिन जिन जंगलों में यह पैदा होता है उनको तस्करों के भरोसे छोड़ दिया है। पिछले कुछ समय से यह गोरखधंधा चल रहा है, लेकिन किसी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ताजा घटना के बाद वन विभाग की टीम हरकत में आई है। वन रेंजर लवराज सिंह पांगती ने बताया कि छह सदस्यों की टीम रारीमैनसिंह जंगल को रवाना कर दी गई है। उन्होंने कहा कि तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र के समाजसेवी हीरा सिंह चिराल ने बताया कि इससे पहले कुछ इलाकों में थुनेर के पेड़ काटे जाने की घटना सामने आई थी।

मामले की जानकारी तत्काल वन विभाग को दी गई। अब तस्कर दूसरे इलाकों में भी घुसने लगे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। मुनस्यारी की जलवायु में थुनेर के पेड़ प्राकृतिक रूप से उग आते हैं। वन विभाग ने दस साल पहले थुनेर की नर्सरी भी बनाई थी, लेकिन यह नर्सरी कोई परिणाम नहीं दे पाई। थुनेर की नर्सरी बनाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन वन विभाग न तो कहीं पर थुनेर के पेड़ उगा पाया और न नर्सरी का कोई फायदा मिला।
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