झूलाघाट में महाकाली से हो रहा खनन
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नेपाल की सीमा को विभाजित करने वाली महाकाली से रात में भी खनन चल रह है। इस कारण भू-कटाव का खतरा बढ़ता जा रहा है। महाकाली के किनारे खनन के कारण बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय खनन होता है और घोड़ों से खनन सामग्री ढोई जाती है। कहा जा रहा है कि खनन करने वालों के साथ कुछ स्थानीय लोग भी मिले हैं।
सीमा पर बसा भारत का कानड़ी गांव ठीक महाकाली के किनारे है। लोगों का कहना है कि रात के 2 बजे से खच्चरों की आवाज सुनाई देने लगती है। खनन के खिलाफ लोग एकजुट होकर आवाज नहीं उठा पाते, क्योंकि गांव के कई लोग खनन करने वालों से मिले हैं। गांव में माहौल लगातार बिगड़ रहा है। जिन लोगों को खनन से चिंता है वह आवाज उठाने में डरते हैं। नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने कहा कि अवैध खनन के कारण नदी के किनारे बनाए गए तटबंध तक ढह गए हैं।
अवैध खनन और गांववालों की परेशानी पुलिस-प्रशासन को मालूम है, लेकिन इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। झूलाघाट थाने से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर यह अवैध खनन हो रहा है। गांव के लोगों का कहना हैं कि नदी से होने वाले अवैध खनन की सूचना जिला मुख्यालय में भी रहती है। यदि कभी कोई टीम चेकिंग के लिए आ जाए, तो उनके आने की सूचना पहले ही वड्डा चौकी के माध्यम से मिल जाती है। अवैध खनन से जहां एक और कुछ लोग फलीभूत हो रहे हैं वहीं दूसरी और गांव के अधिकांश लोग परेशान भी हैं।
खनन के चलते बने बड़े-बड़े गड्ढे
महाकाली में हो रहे दिन-रात अवैध खनन से जहां नदी भारतीय तटों को काटती जा रही है, वहीं दूसरी ओर नदी के किनारे रेत के बड़े-बड़े गड्ढे बनते जा रहे हैं, जो नदी के किनारे घूमने जाने वालों के लिए किसी दुर्घटना का कारण भी बनते जा रही है।
एसडीएम अभी जांच को नहीं गए
एसडीएम एसके पांडे ने तत्काल जांच पर जाने की बात तो कही है, लेकिन मंगलवार को वह इतने व्यस्त थे कि जांच के लिए नहीं जा पाए। एसडीएम मंगलवार को मतदाता जागरूकता के लिए नारायणनगर गए हैं। एक-दो दिन में वह जांच के लिए जाएंगे।