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सरकारें राशन न भेजें तो पहाड़ के गांवों में आ जाएगी भुखमरी की नौबत

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पिथौरागढ़ के बडारी गांव में जंगली जानवरों की समस्याओं पर चर्चा करते ग्रामीण बुजुर्ग। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। पूरा पहाड़ जंगली जानवरों की समस्या से जूझ रहा है। यहां दिन में बंदर, भालू तो रात में सुअर और सेही फसलों को चट कर जा रहे हैं। किसानों की मेहनत खेतों में ही बरबाद हो जाती है। इसके बावजूद जंगली जानवरों की समस्या से निजात दिलाने के नाम पर महज कोरे आश्वासन ही दिए जाते रहे हैं। हालात यह हैं कि कई परिवारों ने खेतीबाड़ी को ही तिलांजलि दे दी है।
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पिथौरागढ़ जिले में 73744 किसान हैं, जो लगभग 42 हजार हेक्टेअर में खेती करते हैं। खेती किसानी की स्थिति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 3200 हेक्टेअर भूमि में ही सिंचाई की सुविधा है। शेष कृषि भूमि असिंचित है। यह असिंचित क्षेत्र की खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर रहती है।
पहाड़ के किसान हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद जब खेतों में फसलें उगाते हैं तो जंगली जानवरों का आतंक शुरू हो जाता है।
दिन भर बंदरों को भगाने में पसीना बहा चुके किसानों के पास इतना साहस नहीं होता है कि रात को भी जंगली सुअरों और सेही से फसलों को बचा सकें। हालात यह हैं कि फसलों से लेकर फल भी जानवरों के हवाले हो चुके हैं।
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किसान जंगली जानवरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग जब करते हैं तो उन्हें केवल आश्वासन ही मिलते रहते हैं। पिथौरागढ़ के बडारी गांव में जब बुजुर्गों से समस्या पर चर्चा की गई तो सभी ने जंगली जानवरों को पहाड़ की मुख्य समस्या बताया। कहा कि पहाड़ के किसानों की उपेक्षा से बेरोजगार और खेतीबाड़ी पर निर्भर परिवार सबसे अधिक परेशान हैं।
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जंगली जानवरों से जब तक निजात नहीं दिलाई जाती है तब तक किसानों के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं बेमानी हैं। - त्रिलोक सिंह
दिनभर बंदर खेतों में रहते हैं। रात होते ही सुअर आ जाते हैं। जंगली जानवरों के कारण हम किसानों की मेहनत बेकार चली जा रही है। - दीवान सिंह
खेती किसानी पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण प्याज और लहसुन तक खेतों में पैदा नहीं हो पा रहा है। - होशियार सिंह
बंदर घरों के भीतर आकर चूल्हे में पका खाना तक खा जा रहे हैं तो खेतों में फसलें, पेड़ों के फल कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। - किशन सिंह
जंगली जानवरों के आतंक से लोग परेशान हैं। शासन-प्रशासन को जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा के लिए ठोस प्रबंध करने चाहिए। - हरीश सिंह
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