मुनस्यारी कालेज में जमीन पर बैठकर परीक्षा देते विद्यार्थी
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ रही है। इन दिनों सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं और शुक्रवार को हिंदी भाषा का पेपर था। 141 विद्यार्थियों ने ठिठुरती ठंड में जमीन पर बैठकर परीक्षा दी।
मुनस्यारी का राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय वर्ष 2001 में खुला था। 17 साल बाद भी संसाधनों की कमी से महाविद्यालय जूझ रहा है। महाविद्यालय को राजकीय इंटर कॉलेज के 3 कमरों में संचालित किया जा रहा है। इस समय महाविद्यालय में 526 विद्यार्थी पढ़ते हैं। महाविद्यालय के प्रत्येक कमरे की क्षमता 33 विद्यार्थियों के बैठने की है। तीन कमरों में 99 विद्यार्थी से ज्यादा होने पर उनको गैलरी पर बैठकर परीक्षा देना पड़ता है।
शुक्रवार को स्नातक हिंदी भाषा का पेपर था। जो सुबह 9 से 11 बजे तक चला। शुक्रवार को परीक्षा देने वाले 240 छात्र-छात्राएं थी। महाविद्यालय द्वारा 3 कमरों में तो 99 विद्यार्थियों को परीक्षा देने के बैठाया गया। शेष 141 विद्यार्थियों के लिए गैलरी में दरी बिछाई गई। मुनस्यारी में इस समय सुबह का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री रहता है। ऐसे में जमीन पर बैठकर परीक्षा देने में विद्यार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
छात्रा राधा का कहना था कि ओएमआर शीट को जमीन पर रखकर भरने में भारी परेशानी हुई। छात्र सुरेंद्र दानू का कहना है कि गैलरी में हवा काफी तेज थी। इस कारण लिखने में परेशानी हुई। अगर बर्फबारी और बारिश होती तो इतने विद्यार्थियों को कहां बैठाया जाता, यह बड़ा सवाल है। परीक्षा प्रभारी डॉ. रवि जोशी ने कहा कि कॉलेज के पास अपना भवन नहीं है। इसी कारण यह समस्या आ रही है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मंजुला चंद का कहना है कि संसाधनों की कमी से कॉलेज जूझ रहा है। छात्रों की संख्या ज्यादा होने और बैठने की सुविधा कम होने के कारण गैलरी पर बैठाकर परीक्षा दिलानी पड़ी।