फोटो- नेपाल के जूलाघाट का बंद बाजार।
- फोटो : AMAR UJALA
संवाद न्यूज एजेंसी, झूलाघाट (पिथौरागढ़)। कोरोना वायरस के बाद लाॅकडाउन होने से नेपाल के जूलाघाट कस्बे के व्यापारी भी रोजी रोटी के लिए जूझ रहे है। 80 दिनों से सीमा पुल बंद होने से यहां की दुकाने भी बंद हैं।
बाज़ार बंद होने से भारतीयों के पसंदीदा नूडल्स का स्वाद बच्चे नहीं चख पा रहे हैं। सीमावर्ती नेपाल के जूलाघाट, दार्चुला, जौलजीवी और बलुवाकोट कस्बों की दुकानें भारत के खरीदारों पर निर्भर है। इन दुकानों में नेपाल सहित तीसरे देश का सामान मिलता है।
नेपाल में विभिन्न कंपनियों के नूडल्स की आज भी भारत में बहुत अधिक मांग है। नेपाल घूमने को आने वाले प्रत्येक व्यक्ति बच्चों के लिए नूडल्स, गर्मी के सीजन की टीशर्ट, शार्टस, रैन कोट और फैंसी छतरी के पसंदीदा ग्राहक हैं। ये सामान सस्ते, फैंसी और टिकाऊ होते है। झूलाघाट में रहने वाले नेपाली परिवारों का व्यापार इन्ही सामानों की बिक्री पर निर्भर है। 22 मार्च से सभी सीमा पुल बंद होने से भारत में रहने वाले नेपाल के व्यापारी उस पार नही जा पा रहे है। पुल बंद होने से व्यापार के प्रभावित होने के कारण लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे है। व्यापरियों ने झूलापुल को रोज कुछ समय के लिए खोलने की मांग की है। फोटो- नेपाल के जूलाघाट का बंद बाजार।
--:: कुछ राहत तो दी जाए :: बंद के कारण बहुत परेशानी होने लगी है। हर बार लाॅकडाउन बढ़ने से पहले सीमा पुल खुलने का शुभ समाचार सुनने की आस रहती है। दोनो सरकारों को सप्ताह में तीन दिन ही सही कुछ घंटो के लिए जूलाघाट तक भारतीय खरीदारों को आने की अनुमति देनी चाहिए।" -- दशरथ खड़ायत, विदेशी सामान के विक्रेता, जूलाघाट, नेपाल।
--::सामान भी बर्बाद हो गया होगा : "तीन माह होने को है झूलाघाट की दुकानें भी खुल चुकी हैं। उनकी परचून की दुकान में इस बीच सामान खराब होने के साथ ही चूहों ने भी काट दिया होगा। सब कुछ धीरे धीरे खुल रहा है। सरकार को भी सीमा पुल कुछ समय के लिए खोलने पर विचार करना चाहिए। ताकि लोगों का रोजगार चल सके।" -संजू भाट, नेपाली नूडल्स के विक्रेता, जूलाघाट, नेपाल।
फोटो- दशरथ खड़ायत
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फोटो- संजू भाट
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