फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उल्लास के साथ चैतोल का डोला उठा

Tue, 11 Apr 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
पिथौरागढ़ में चैतोल पर्व पर डोला लेकर आते लोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सोरघाटी के गांवों में मंगलवार को देवलसमेत बाबा की डोला यात्रा के साथ चैतोल का समापन हो गया। एक डोला चैंसर गांव से और एक डोला जाखनी से उठा। यह दोनों डोले साथ-साथ निकले, जबकि एक अन्य डोला लुंठ्यूड़ा गांव से निकला। तीनों का मिलन घंटाकरण शिव मंदिर में हुआ। तीनों गांवों के डोलों को जयकारों के साथ और ढोल-नगाड़ों के बीच लाया गया। इस दौरान आस्था, उल्लास और रोमांच का अद्भुुत संगम देखने को मिला। मान्यता है कि देवलसमेत बाबा चैत्र में अपनी 22 बहनों को भिटौला देने जाते हैं। मंगलवार को भी पहले सोरघाटी के 11 गांवों में देवलसमेत बाबा की छतरी घुमाई गई।
विज्ञापन


जाखनी के डोले में देवडांगर किशन सिंह महर और चैंसर के डोले में देवडांगर दीवान सिंह महर बैठे। दोनों डोलों को पहले कुमौड़ गांव ले जाया गया। वहां से सिल्थाम, बैंक रोड होते हुए घंटाकरण के शिव मंदिर में लुंठ्यूड़ा के डोले के साथ इनका मिलन हुआ। हजारों की संख्या में लोगों ने डोला यात्रा को देखा और देवलसमेत बाबा का आशीर्वाद लिया। बाद में यह डोले विण के तपस्यूड़ मंदिर में विसर्जित किए गए। लुंठ्यूड़ा का डोला वापस गांव ले जाया गया। 

नंदा राजजात की तरह विकसित हो चैतोल
पिथौरागढ़। भाजपा ने सोरघाटी के 22 गांवों में होने वाली चैतोल यात्रा को नंदा राजजात यात्रा की तरह विकसित करने की मांग की है। भाजपा जिला महामंत्री गोपू महर ने संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को भेजे पत्र में कहा है कि इस विशिष्ट सांस्कृतिक आयोजन को ज्यादा महत्व देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने भी इस मुद्दे को रखा जाएगा।
विज्ञापन


माजिरकांडा, जाखपंत में भी चैतोल संपन्न
झूलाघाट। माजिरकांडा के मनमहेश मंदिर में चैतोल संपन्न हो गई। सिरकुच के खंडेनाथ मंदिर से माजिरकांडा तक चैतोल की छतरी ले जाई गई। सैकड़ों लोगों ने आशीर्वाद लिया। पुजारी तुलसी दत्त भट्ट और मुरलीधर भट्ट ने बताया कि भगवान शिव के रूप खंडेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यह आयोजन होता है। इस क्षेत्र के चैतोल में ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर अपनी बहन नंदा को भिटौली देने जाते हैं। जाखपंत, सिरकुच और माजिरकांडा गांवों से अलग-अलग देव छतरी निकलती है। छतरी को हर घर तक ले जाया जाता है। लोग सुख, शांति की कामना करते हुए इन छतरी पर पुष्प और अक्षत अर्पित करते हैं। इन गांवों में सात दिन तक चैतोल की उपासना की जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें