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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मची है धूम

Sat, 26 Aug 2017 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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मोस्टामानू मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
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मोस्टामानू/मेला महोत्सव में शनिवार को सुबह से देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झड़ी लगी रही। महोत्सव में पहुंचे वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने महोत्सव संचालन के लिए सरकार की ओर से तीन लाख रुपये देने की घोषणा की।
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मुख्य अतिथि केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वित्त, पेयजल मंत्री प्रकाश पंत और अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री टम्टा ने कहा कि नैनीसैनी हवाई पट्टी से उड़ान योजना के तहत हवाई सेवा शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। केवल ढाई हजार रुपये में एक घंटे की यात्रा की जा सकेगी। कहा कि पंचेश्वर बांध बनने के बाद पिथौरागढ़ वाटर स्पोर्ट्स के लिए जाना जाएगा। सरकार सड़कों का विस्तार कर रही है। टनकपुर से चीन सीमा तक ऑल वेदर रोड की मंजूरी इसी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ में सेना के भर्ती मेले लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने पिथौरागढ़ में काष्ठकला उद्योग खोलने की घोषणा की। कहा कि इसके लिए जमीन का चयन किया जा रहा है।

वित्त मंत्री पंत ने राज्य सरकार की ओर से मेला संचालन के लिए तीन लाख रुपये देने की घोषणा की। मां शारदे गोरंगघाटी दल, कुमाऊं लोक कलादर्पण मंच के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोक गायक प्रकाश रावत, कैलाश कुमार, आयुश कोटवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष शमशेर महर ने गीत प्रस्तुत किए। मेला/महोत्सव समिति के संरक्षक मेला प्रभारी वीरेंद्र सिंह बोहरा, समिति के अध्यक्ष गणेश दत्त कांडपाल, सचिव सुभाष फुलारा, मीडिया प्रभारी एनडी कांडपाल ने सभी का आभार जताया। इस दौरान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केदार जोशी, भाजपा नेता महेंद्र लुंठी, राजेंद्र रावत, ललित पंत, गोपू महर, कृपाल वल्दिया, बसंत जोशी, ललित धानिक, प्रकाश जोशी, जिला बार संघ के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट, व्यापार मंडल अध्यक्ष शमशेर महर, भगवान पंत आदि मौजूद थे। संचालन जनार्दन उप्रेती, कैप्टन दीवान सिंह वल्दिया ने किया। महोत्सव का समापन रविवार को होगा।
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भगवान मोस्टामानू ने अपने वजूद का अहसास कराया
भगवान मोस्टामानू को बारिश का देवता माना जाता है। बारिश न होने पर लोग भगवान मोस्टामानू की आराधना करते हैं। मान्यता है कि मोस्टामानू के मेले के दिन अवश्य बारिश होती है। मान्यता को देखते हुए लोग अपने साथ पहले से ही छतरी लेकर आए थे। लोगों का विश्वास जाया नहीं गया। दोपहर करीब 12 से दो बजे तक मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के दौरान लोगों ने छतरी ओढ़कर मोस्टामानू महोत्सव के कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया।
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