पिथौरागढ़। सीमांत जिले में महिलाओं में बच्चेदानी में संक्रमण और गांठ के मामले बढ़ गए हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर रोज इस दिक्कत से जूझते हुए जिले के विभिन्न स्थानों से 50 से अधिक महिलाएं इलाज के लिए महिला अस्पताल पहुंच रही हैं। इनमें युवतियां भी शामिल हैं। इन मामलों के बढ़ने से विशेषज्ञ भी चिंतित हैं।
महिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, बीते कुछ समय से बच्चेदानी में संक्रमण और गांठ के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। महिला अस्पताल में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 120 से अधिक महिलाएं जांच और इलाज के लिए पहुंचती हैं। इनमें से 50 से अधिक महिलाएं बच्चेदानी में संक्रमण और गांठ की समस्या से जूझते हुए पहुंच रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, खराब जीवनशैली, हार्मोन असंतुलन, मोटापा और गलत खान-पान इसके प्रमुख कारण हैं। इसमें असामान्य रक्तस्राव, पेट दर्द और गर्भधारण में दिक्कत जैसी गंभीर समस्याएं हो रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए ये समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
ल्यूकोरिया के मामलों में भी हुई बढ़ोतरी
सीमांत की महिलाओं में ल्यूकोरिया (सफेद पानी) के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। महिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, इस दिक्कत से जूझते हुए हर रोज 15 से अधिक महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। संक्रमण, हार्मोन असंतुलन, गलत खानपान, तनाव और स्वच्छता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
बीमार हो रहीं महिलाएं, इलाज के लिए विशेषज्ञ नहीं
सीमांत जिले में महिलाओं का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में एक भी स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। जिला महिला अस्पताल में अनुबंध पर एकमात्र महिला रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इसके अलावा किसी भी अस्पताल में विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है।
प्रमुख लक्षण
- पेट के निचले हिस्से में दर्द, बार-बार पेशाब आना और शरीर में कमजोरी इसके मुख्य लक्षण हैं।
कारण
- मोटापा, तनाव, प्रोसेस्ड फूड का सेवन और हार्मोन असंतुलन इन समस्याओं के प्रमुख कारण हैं।
बचाव
हार्मोन असंतुलन को ठीक करने के लिए दवा जरूरी है। बड़ी गांठ की सर्जरी करनी पड़ सकती है। पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और तनाव से दूरी से इन दिक्कतों से बचा जा सकता है।
कोट
बच्चेदानी में संक्रमण और गांठ के मामले बढ़े हैं। इन दिक्कत से दूर रहने के लिए महिलाओं को जागरूक रहना होगा। हर महिला को बेहतर इलाज मिले इसके लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। - डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़