एक किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाती मल्लाढुंगा गांव की महिलाएं और बच्चे
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ग्राम पंचायत गोल के अंतर्गत मल्लाढुंगा गांव के 60 परिवारों के लोगों का पूरा दिन पानी ढोने में ही बीत जाता है। 20 साल पहले विकासखंड के मद से बनी एकल ग्राम योजना की मरम्मत के लिए न तो जल निगम और न जल संस्थान कोई धनराशि नहीं देता है। गांव के लोग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राकृतिक स्रोत से पानी की व्यवस्था करते हैं। महिलाओं और बच्चों को रोज उजाला होते ही पानी की व्यवस्था में जुटना पड़ता है। सुकून की बात यह है कि प्राकृतिक स्रोत से लोगों को हर सीजन में पर्याप्त पानी मिल जाता है।
बताया गया कि विकासखंड के मद से मल्लाढुंगा गांव के लिए एकल ग्राम पेयजल योजना का निर्माण हुआ था। शुरुआत में तो योजना सही ढंग से चली, लेकिन बाद में इसमें दिक्कत आने लगी और मूल स्रोत में बनी टंकी ध्वस्त हो गई। फिर पाइप लाइन भी टूटकर नष्ट हो गई। 2010 के बाद इस योजना से पानी चलना बंद हो गया। गांव के लोगों ने विकासखंड कार्यालय को पत्र देकर योजना की मरम्मत के लिए धनराशि की मांग की, लेकिन वहां से कोई धनराशि स्वीकृत नहीं हुई। बाद में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस से भी लोग मिले, लेकिन उन्होंने भी एकल ग्राम योजना की मरम्मत के लिए विभाग के पास किसी प्रकार का बजट न होने की बात कह दी।
तत्काल नई पेयजल योजना मंजूर की जाए
मल्लाढुंगा निवासी जमन राम का कहना है कि गांव के लिए तत्काल नई पेयजल योजना मंजूर की जाए, वर्ना संकट लगातार बढ़ता जाएगा। वह कहते हैं कि गांव के लोगों की सारी ऊर्जा पानी के इंतजाम में ही लग रही है। यदि पेयजल लाइन बन जाती तो बहुत बड़ी समस्या हल हो जाती। उन्होंने कहा कि गांव के लोग इसके लिए आंदोलन करेंगे।
यह सरकारी उपेक्षा का परिणाम
मल्लाढुंगा गांव के संतोष राम का कहना है कि यह सरकारी उपेक्षा का परिणाम है। जब कोई विभाग योजना का निर्माण कराता है तो उसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी विभाग को लेनी चाहिए। गांव के गरीब लोग कैसे योजना की मरम्मत करेंगे। उनके पास योजना की मरम्मत का सामान खरीदने के लिए पैसा नहीं है।