पिथौरागढ़। कोरोना काल में रोडवेज को रोज 11 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। रोडवेज की आय मात्र 35 हजार रुपये हो रही है। इससे बसों के तेल का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। ये नुकसान रोज बढ़ता जा रहा है।
मुश्किल से सवारियां मिल रही हैं। बसें भी टनकपुर और हल्द्वानी तक ही सीमित रह गईं हैं। इसमें भी सवारियां नहीं मिल रहीं हैं। कोरोना की दूसरी लहर के चलते पिछले दो माह से रोडवेज लगभग ठप हो चुकी है।
रोडवेज 50 फीसदी क्षमता के हिसाब से बसों का संचालन कर रहा है। लंबी दूरी की सवारी रोडवेज को नहीं मिल रहीं हैं। सामान्य दिनों में रोडवेज की 20 बसों का संचालन होता था लेकिन आजकल तीन बसें टनकपुर और एक धारचूला तक आ-जा रही है।
लंबी दूरी की बसों का नहीं हो रहा संचालन
पिथौरागढ़। कोरोना की मार के कारण 17 अप्रैल से रोडवेज लगातार घाटे में चल रही है। दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, बदायूं, बरेली, देहरादून को बसों का संचालन ठप है। यात्रा भी रोडवेज स्टेशन में न के बराबर दिख रहे हैं।
टैक्सी चालक भी परेशान
पिथौरागढ़। कोरोना के चलते टैक्सी संचालन भी प्रभावित है। टैक्सी यूनियन अध्यक्ष नवल किशोर ने बताया कि कोरोना के डर से लोगों ने यात्रा करना ही छोड़ दिया है। टैक्सी चालक बेरोजगार हैं। पहले रोज 20 से अधिक टैक्सी वाहन हल्द्वानी आते-जाते थे लेकिन अब घाट तक भी सवारी मिलना मुश्किल हो गया है।
अगर टैक्सी बुकिंग में हल्द्वानी चली भी गई तो वापसी में सवारी मिलना ही मुश्किल हो रहा है। सिर्फ समाचार पत्र लाने ले जाने वाले वाहन ही पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आ-जा रहे हैं। इसलिए सरकार को टैक्सी चालकों को आर्थिक मदद देनी चाहिए थी।
कोरोना के मद्देनजर जारी एसओपी के बाद रोडवेज परिवहन निगम रोज 11 लाख रुपये का नुकसान झेल रहा है। 50 फीसदी क्षमता के हिसाब से चलने की शर्त के कारण कभी सवारी मिलने पर एक रूट पर दो-तीन बसें तक चलानी पड़ रहीं हैं। सवारियां मिलने पर करीब 35 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे बसों के तेल का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
- आरके आर्या, एआरएम