महिलाएं कमजोर नहीं हैं और उन्हें खुद को कमजोर समझना भी नहीं चाहिए। छेड़छाड़ या किसी तरह की हिंसा को नजरअंदाज करने के बजाय इसका खुलकर विरोध करना चाहिए। महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं और पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। यह बात पुलिस अधीक्षक प्रीति प्रियदर्शनी ने कही। वह राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमर उजाला ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत हिमालया पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं और बालिकाओं को संबोधित कर रहीं थीं।
प्रियदर्शनी ने कहा कि बालिकाएं लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ें। उन्होंने अपेक्षा की कि हर परिवार बालक-बालिका में भेदभाव को समाप्त कर उनको समान अवसर देगा। उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं को कानून की जानकारी दी।
महिला चिकित्सक डॉ.लवि पुनेठा ने महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुना और उनका समाधान भी किया। ताइक्वांडो प्रशिक्षक आइशा ने आत्मरक्षा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा के तरीकों की जानकारी होने से महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है।
तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त लक्ष्मी भट्ट और हेमा थलाल ने बच्चों को संस्कारवान बनाने पर जोर दिया। कहा कि महिलाएं कमजोर नहीं हैं। उन्हें दूसरों पर निर्भरता के बजाय अपनी क्षमता पहचाननी होगी। घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं प्रधानाचार्य अजय ओली ने भी बालिकाओं को संबोधित किया। संचालन मुकेश पंत ने किया।
बालिकाओं के सवाल पुलिस अधीक्षक के जवाब
प्रश्न : रेप की घटना होने पर लड़की को ही क्यों दोषी ठहराया जाता है।
बीना मेहता।
उत्तर : समाज में पवित्रता शब्द का इस्तेमाल केवल महिलाओं के लिए प्रयोग किया जाता है। समाज और लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। अपराध और अपराधी का विरोध करना चाहिए।
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प्रश्न : छेड़छाड़ जैसी घटना में लड़कियां दोषी और लड़के निर्दोष क्यों माने जाते हैं। -दिव्या खत्री।
उत्तर : दोषी वह है जो छेड़छाड़ कर रहा है। इस तरह की घटनाओं का विरोध करें। जब महिला प्रसव पीड़ा जैसा कष्ट झेल सकती है तो पुरुषों का मुकाबला भी कर सकती है। स्वयं को कमजोर नहीं ताकतवर समझें।
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प्रश्न : कई बच्चों से आज भी भिक्षावृत्ति और बाल श्रम कराया जाता है। इससे कैसे छुटकारा पा सकते हैं।
बबीता।
उत्तर : बालश्रम और बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना अपराध है। इस तरह के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा और भोजन की व्यवस्था की जानी जरूरी है। पुलिस भी इसका पता लगाएगी।
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प्रश्न : मेरा लक्ष्य आईपीएस बनने का है, लेकिन कर पाऊंगी यह शंका रहती है। आईपीएस बनने के लिए क्या करना होगा।
- सोफिया सैफी
उत्तर : मेरे पिताजी ने बहुत मेहनत कर मुझे पढ़ाया। मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान स्क्रू काटने वाली मशीन भी चलाई। दिल्ली में डीसीपी की गाड़ी के नो एंट्री में जाने के बाद आईपीएस के बारे में जाना और आईपीएस बनने की ठानी। संशय नहीं होना चाहिए। पुलिस में जितनी लड़कियां आएंगी उतना ही बदलाव आएगा।
सोच बदलो, सबकुछ बदल जाएगा
लोगों की भेदभाव पूर्ण सोच के कारण लिंगानुपात में बड़ा अंतर आया। आज भी बालकों और बालिकाओं की संख्या में बहुत अंतर है। लोगों को सोच बदलने की जरूरत है। बेटा-बेटी को समान मानने और समान अवसर देने से ही समाज प्रगति करेगा।
डॉ. लवि पुनेठा।
इन्होंने भरे शपथ पत्र
एसपी प्रीति प्रियदर्शनी, आइसा विश्वकर्मा, डॉ. लवि पुनेठा, हेमा थलाल, लक्ष्मी भट्ट, रिया बिष्ट, तनूजा सामंत, आकांक्षा ऐरी, प्रेमा सुतेड़ी, दीपा थापा, दीपिका जोशी, सविता कोहली, रेखा कापड़ी, बीना मेहता, भावना भट्ट, सोफिया सैफी, कशिश पोखरिया, रेनू खोलिया, आयशा खाती, जिया कोठारी, आरती धामी, प्रीति पांडे, प्रीति अंडोला, कोमल धामी, रितु बिष्ट, पायल थापा, चांदनी धामी, काजल भंडारी, रितिका कार्की, संजना बटकोरा, भूमि कुंवर, दीक्षा, आरती दानू, हंसा पंत, सरोज कापड़ी, रेखा पांडेय, भावना चौबे, प्रियंका चौबे, नमिता जोशी, सुशीला उपाध्याय, कृतिका गर्ब्याल, काजल फर्स्वाण, नेहा वल्दिया, कशिश आर्या, ममता गड़कोटी, नंदनी टम्टा, रिया पांडेय, दीक्षा पांडेय, दिव्या रस्तोगी, अनीता ठकुराठी, प्रिया टम्टा, निकिता बिष्ट, मेघा चमलेगी, कंचन पंत, कविता सामंत, बीना, ज्योति, भावना देवी, रिया अंडोला, दीपिका सामंत, निकीता कार्की, ज्योति जोशी, मोनिका जोशी, हिमानी बिष्ट, मोनिका, सपना चंद, बबीता बोहरा, दिया खत्री।
पिथौरागढ़ में अपराजिता कार्यक्रम में शपथ दिलातीं एसपी प्रीति प्रियदर्शनी। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़ में अपराजिता कार्यक्रम में बोलतीं एसपी प्रीति प्रियदर्शनी। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : PITHORAGARH