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बस्तड़ी के आपदा पीड़ितों का कोई सुधलेवा नहीं 

Mon, 30 Jan 2017 11:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
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बस्तड़ी के आपदा प्रभावित अनुसूचित जाति के परिवार। - फोटो : अमर उजाला
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 तीस जून 2016 की रात दैवी आपदा से प्रभावित बस्तड़ी के कई परिवारों को तो सरकारी तौर पर राहत मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों की सुध किसी ने नहीं ली। इन लोगों के सामने अब आवास का 3संकट गहरा गया है।
बस्तड़ी की आपदा के तुरंत बाद कई नेता, अधिकारी, समाजसेवी गांव पहुंचे थे। आपदा में 21 लोगों की मौत हो गई थी। आपदा के बाद खतरे को देखते हुए बस्तड़ी गांव खाली करा दिया गया। उस समय लोग सिंगाली कस्बे में आकर किराए के मकानों में रहने लगे थे। सरकार ने आपदा से प्रभावित लोगों को तीन-तीन लाख रुपए मकान बनाने के लिए जारी कर दिए हैं लेकिन बस्तड़ी के अनुसूचित जाति के पांच परिवारों के पास बस्तड़ी के अलावा कहीं भी जमीन न होने से उनके सामने मकान बनाने का संकट गहरा गया है। 
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आपदा प्रभावित प्रताप राम का कहना है कि बस्तड़ी में रहने वाले पांच अनुसूचित जाति के परिवारों के पास अपनी तीन से पांच नाली नाप भूमि बस्तड़ी में ही थी। इसके अलावा अन्यत्र कहीं भी जमीन न होने से उनके सामने अब मकान बनाने की समस्या खड़ी हो गई है। सरकार ने मकान बनाने के लिए जो शर्त रखी है उसके अनुसार जमीन को उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। अनुसूचित जाति के परिवारों के पास सुरक्षित स्थान पर जमीन का टुकड़ा नहीं है। आपदा प्रभावित दानी राम का कहना है कि उनका परिवार सिगांली में किराए के मकान में रह रहा है। अब मकान मालिक अपना मकान सुधार रहा है, उन्हें यह मकान खाली करना पड़ रहा है।
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प्रत्याशियों के रवैए से आपदा पीड़ित नाराज
 आपदा पीड़ितों का कहना है कि चुनाव के समय आ रहे प्रत्याशी तथा उनके समर्थक समस्या समाधान की कोई पहल नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि वोट मांगने वालों से यही कहा जाएगा कि वह सबसे पहले पीड़ितों के आवास और पुनर्वास की व्यवस्था करें।
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