बोकटा गांव से पहली बार गाड़ी से जाती दुल्हन
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डीडीहाट और कनालीछीना विकासखंड के बीच स्थित बोकटा गांव से आजादी के बाद पहली बार किसी दुल्हन को घर के पास से ही गाड़ी में बैठाकर विदा किया गया। इससे पहले जितनी भी बेटियों की शादी हुई उन सभी को छह किलोमीटर के खतरनाक रास्ते से पैदल जाना पड़ा था। गांव के लोग बेटी को विदा करते समय थोड़ा भावुक जरूर थे, लेकिन उनको खुशी इस बात की भी थी कि यह पहली बेटी है, जिसे छह किलोमीटर का पैदल सफर तय नहीं करना पड़ा।
बोकटा गांव के लोग 20 साल से सड़क की मांग उठा रहे थे, लेकिन उनकी आवाज को कभी सरकारी तंत्र ने तो कभी जनप्रतिनिधियों ने दबा दिया। सड़क के लिए गांव के लोगों ने कई बार चुनाव बहिष्कार जैसे कदम भी उठाए। करीब 500 की आबादी वाले इस गांव में जब सड़क ही नहीं थी तो अन्य सुविधाओं के बारे में सोचना बेमानी होगी। ठीक एक माह पहले विधायक विशन सिंह चुफाल ने लोगों की इस व्यथा को महसूस करते हुए अपने खर्च पर बोकटा के लिए सड़क की कटिंग शुरू करवाई। उन्होंने किराए पर जेसीबी मंगाई और करीब 15 दिन के भीतर छह किलोमीटर लंबी सड़क बनकर तैयार हो गई।
सड़क बनने के बाद 28 मई को गांव में पहला वैवाहिक कार्यक्रम हुआ। बोकटा गांव के जगत सिंह की बेटी ज्योति का विवाह थल के चंदू के साथ हुआ। इस बारात के लिए सामग्री लोगों ने वाहनों से गांव तक पहुंचाई। गांव के लोगों को सबसे सुखद अनुभूति तब हुई जब दुल्हन ज्योति को घर के पास से ही गाड़ी में बैठाकर विदा किया गया।