750 किलोवाट क्षमता की बरार लघु जल विद्युत परियोजना से उत्पादन ठप हो गया है। पावरहाउस तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई नहर का बड़ा हिस्सा सलेत के पास टूट गया है। बिजली उत्पादन ठप होने से थल बाजार समेत आसपास के गांवों में बिजली का संकट गहराने लगा है। अब इन इलाकों को ग्रिड से मिलने वाली बिजली से जोड़ा गया है। जब तक बरार परियोजना से उत्पादन शुरू नहीं हो जाता तब तक यही स्थिति बनी रहेगी।
बरार लघु जल विद्युत परियोजना का संचालन पहले लघु जल विद्युत निगम करता था। दो वर्ष पूर्व शासन ने यह फैसला लिया था कि तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी उरेडा को सौंप दी थी। उरेडा के हाथ में संचालन की जिम्मेदारी आते ही बरार परियोजना के दुर्दिन शुरू हो गए। इससे पहले आठ महीने तक परियोजना से उत्पादन ठप रहा। मई में नहर की मरम्मत करने के बाद उत्पादन शुरू किया था लेकिन नहर फिर से टूट गई है। परियोजना में बार बार आ रहे व्यवधान को लेकर उपभोक्ताओं में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि छोटी बिजली परियोजनाओं का निर्माण इसीलिए किया गया था कि स्थानीय स्तर पर लोगों को बिजली मिल जाए लेकिन अधिकारियों की हीलाहवाली से यह योजनाएं उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं दे पा रही हैं और सिर्फ कमीशनखोरी का अड्डा बन रही हैं।
इधर, उरेडा के परियोजना अधिकारी अखिलेश कुमार शर्मा ने कहा कि नहर की मरम्मत का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। उन्होंने कहा है कि अब नहर की मरम्मत का काम किसी नए ठेकेदार को दिया जाएगा और मौके पर ही निर्माण सामग्री की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन से प्रस्ताव मंजूर होने में कम से कम एक माह का समय लग सकता है।