राज्य विधानसभा चुनाव के चौथे चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। पिछले तीन चुनावों में हार-जीत का गणित देखें तो धारचूला सीट को अब तक भाजपा जीतने में नाकाम रही है। गंगोलीहाट सीट पर ‘एक बार तू एक बार मैं’ की राह पर भाजपा, कांग्रेस चली है। हालांकि, डीडीहाट सीट को कांग्रेस नहीं जीत पाई है, जबकि पिथौरागढ़ सीट दो बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस ने जीती है।
राज्य गठन के बाद जिले में पिथौरागढ़, कनालीछीना, धारचूला, डीडीहाट, गंगोलीहाट पांच विधानसभा सीटें थी। वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में पिथौरागढ़ सीट भाजपा के प्रकाश पंत, कनालीछीना सीट उत्तराखंड क्रांति दल के काशी सिंह ऐरी, धारचूला सीट निर्दलीय वनराजि गगन सिंह रजवार, डीडीहाट सीट भाजपा के विशन सिंह चुफाल, गंगोलीहाट सीट कांग्रेस के नारायण राम आर्य ने जीती। वर्ष 2007 के चुनाव में पिथौरागढ़ में भाजपा के प्रकाश पंत, कनालीछीना में कांग्रेस के मयूख महर, धारचूला में निर्दलीय गगन सिंह रजवार, डीडीहाट में भाजपा के विशन सिंह चुफाल, गंगोलीहाट में भाजपा के जोगा राम टम्टा जीते।
इसी बीच विधानसभा सीटों का जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो जिले की कनालीछीना सीट समाप्त हो गई। जनजाति के लिए आरक्षित धारचूला सीट सामान्य हो गई। वर्ष 2012 के चुनाव में पिथौरागढ़ से कांग्रेस के मयूख महर ने जीत हासिल की। धारचूला से कांग्रेस के हरीश धामी, डीडीहाट से एक बार फिर भाजपा के विशन सिंह चुफाल, गंगोलीहाट से कांग्रेस के नारायण राम आर्य ने जीत दर्ज की। वर्ष 2014 में हुए उप चुनाव में धारचूला सीट मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जीती। इस बार पहले से चला आ रहा मिथक टूटता है या नहीं यह 11 मार्च को मतगणना के साथ ही स्पष्ट होगा।
इस बार डीडीहाट में है घमासान
डीडीहाट में वर्ष 1996 से भाजपा के विशन सिंह लगातार जीतते आ रहे हैं। इस बार चुफाल को कभी उनके खासमखास रहे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष किशन सिंह भंडारी से चुनौती मिल रही है। पिछले तीन साल से डीडीहाट में सक्रिय भंडारी भी भाजपा से टिकट के दावेदार हैं। बीते दो जनवरी को डीडीहाट में शक्ति प्रदर्शन के दौरान भंडारी ने टिकट न मिलने की दशा में निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान किया है। भंडारी के तेवरों से भाजपा पसोपेश में है।