सुअर और बंदरों से किसी तरह बचाकर रखी गई किसानों की फसल पर इस बार प्रकृति ने भारी कहर बरपा दिया है। इस तहसील के ओगला, ढुंगालगांव, चर्मा घाटी इलाके में किसानों की एक हजार नाली जमीन पर बोई गई गेहूं की फसल ओलों की मार और बेमौसम बारिश से चौपट हो गई है। किसानों ने तबाह हुई फसल को जानवरों के चारे के लिए काटना शुरू कर दिया है। मसूर, सरसों, लाही, चना की फसल पर भी ऐसी ही मार पड़ी है। इस घाटी वाले इलाके में आम के फल बौर आते समय ही झड़ गए हैं। केला और पपीता के फलों पर भी ओलों की भारी मार पड़ी है। इलाके के किसानों ने कहा है कि फसल का सौ फीसदी हिस्सा तबाह हो गया है। अब उनके पास बीज के लिए भी फसल नहीं बची है।
राजस्व विभाग ने फसलों को हुए नुकसान का आकलन तो शुरू कर दिया है लेकिन किसानों को कब तक राहत राशि मिलेगी कहा नहीं जा सकता। तहसीलदार पीसी पंत ने बताया कि सभी इलाकों में राजस्व टीम क्षति का आकलन करने लगी है।