बैली ब्रिज ध्वस्त होने के कारण इस तरह सामान ले जा रहे हैं प्रवास पर मूल गांवों की ओर जाने वाले
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी-मिलम मार्ग पर बना बैली ब्रिज एवलांच आने से ध्वस्त हो गया है। इसके चलते प्रवास पर मूल गांवों के लिए लौट रहे ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। लोग ध्वस्त पुल के ऊपर से जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
मुनस्यारी-मिलम गांव को जोड़ने के लिए ग्वांखा नदी पर बीआरओ ने बैली ब्रिज बनाया था। इससे स्थानीय ग्रामीणों सहित भारत-चीन सीमा पर ड्यूटी करने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को आवागमन में सुविधा मिलती थी। इस वर्ष भारी बर्फबारी से कई जगहों पर ग्लेशियर बन गए थे। अप्रैल-मई तक अधिक बर्फ जमी होने से लोग आवाजाही नहीं करते हैं। अब जब बर्फ पिघली तो माइग्रेशन वाले लोग अपने मूल गांवों के लिए रवाना हुए लेकिन उन्हें यहां बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त मिला। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों एवलांच आने से यहां स्थित बैली ब्रिज ध्वस्त हो गया था। इसके चलते लोगों को आवागमन करने में दिक्कतें आ रही हैं।
क्षतिग्रस्त पुल के मलबे के ऊपर से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खाद्यान्न सामग्री ले जा रहे हैं। जिस तरह से लोग आवाजाही कर रहे हैं, उससे कभी भी हादसा हो सकता है। पुल के नदी पर लटक जाने से भेड़-बकरियों सहित अन्य मवेशी दूसरी ओर नहीं जा पा रहे हैं। मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मशक्तू ने बताया कि शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण सीमांत के लोगों को इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मिलम के लिए मोटर मार्ग के निर्माण कार्य की सुस्त गति के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वर्षों से सीमांत के लोग उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। प्रशासन से मार्ग को शीघ्र दुरुस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जनता की अनदेखी की गई तो सीमांत के लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
कोट
बीआरओ का बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ है। नया पुल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी गई है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए नदी पर शीघ्र अस्थायी पुल तैयार कराया जाएगा। - आशीष जोशी, एसडीएम मुनस्यारी