धारचूला (पिथौरागढ़)। देश की प्रथम महिला एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल ने पर्वतारोहियों के एक दल के साथ पवित्र आदि कैलाश की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने व्यास घाटी के अनुपम सौंदर्य की सराहना करते हुए कहा कि उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ।
आदि कैलाश यात्रा से लौटकर एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल और उनके दल का गुंजी गांव में प्रधान पूर्व आईजी विमला गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल समेत होम स्टे संचालकों ने स्वागत किया। इस मौके पर बछेंद्री पाल ने आदि कैलाश दर्शन को अद्भुद बताया। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की नगरी के दर्शन से उन्हें आत्मीय शांति मिली है। उन्होंने सीमांत के लोगों के व्यवहार की प्रशंसा करते हुए यात्रा को यादगार बताया। साथ ही कहा कि यदि मौका मिला तो वह फिर से आदि कैलाश के दर्शन को जरूर आएंगी। बता दें कि पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर तिरंगा फहराया था।
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33,487 यात्रियों को इनर लाइन पास जारी
आदि कैलाश दर्शन के लिए यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 33,487 यात्रियों को पास जारी किए गए हैं। यात्री आदि कैलाश के साथ ही ओम पर्वत और काली नदी के उद्गम स्रोत कालापानी के दर्शन के लिए भी पहुंच रहे हैं। कई यात्री दारमा घाटी स्थित पंचाचूली के दर्शन को भी जा रहे हैं।
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यात्रियों को दिलाई हिमालय बचाओ की शपथ
केएमवीएन की ओर से संचालित आदि कैलाश यात्रा के अंतिम दल को पर्यटक आवास गृह से हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ धारचूला को रवाना किया गया। टीआरसी के पूर्व प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने यात्रियों को हिमालय बचाओ अभियान की शपथ दिलाई। पौधरोपण अभियान के 691 वें दिन उन्होंने यात्रियों को गुंजी एवं कालापानी में रोपण के लिए पौधे दिए। दल में विभिन्न प्रांतों के 10 यात्री शामिल हैं। यहां दल के कोऑर्डिनेटर अर्जुन सिंह बोरा, प्रबंधक उमेश पांडे, हंसी, रचना, नरेंद्र थापा, गोपाल, शेर सिंह, देवेंद्र आदि मौजूद रहे।