जर्जर हाल बरम का आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद
बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील के बरम का एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। एलोपैथिक इलाज के लिए यहां के लोगों को 45 किलोमीटर दूर धारचूला या फिर 85 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
बरम क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। यहां के लगभग 15 गांवों के लिए स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल है। इसमें भी चिकित्सक नहीं है। इस अस्पताल का संचालन फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। दूरस्थ गांव मेतली, भटबटा, देवलेख, चौपता, सोनगांव, ओखलढुंगा गांव के लोगों को गंभर बीमार होने पर इलाज के लिए धारचूला या फिर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है।
यह सभी गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। इधर आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन भी जर्जर हो चुका है। क्षेत्रवासियों ने आयुर्वेदिक अस्पताल का नया भवन बनाने और स्टाफ की नियुक्ति के साथ ही बरम में एलोपैथिक अस्पताल खोलने की मांग की है।
कोट
क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। लोगों को उपचार के लिए धारचूला या पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। एलोपैथिक अस्पताल खोला जाना चाहिए। - भूपेंद्र सिंह परिहार, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बरम।
जनता वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए गुहार लगा रही है। अभी तक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कोई पहल नहीं हुई है। - देवेंद्र सिंह परिहार, समाजसेवी, बरम।