डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट जिले की मांग को लेकर आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा। आमरण अनशनकारी लवि कफलिया और दान सिंह देउपा के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है। इसके बाद भी दोनों अनशनकारी चट्टान से मजबूत इरादे लिए अनशन पर डटे रहे। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आमरण अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की।
टैक्सी यूनियन ने रामलीला मैदान में डीडीहाट जिले की मांग को लेकर चल रहे आमरण अनशन के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि डीडीहाट जिला 15 अगस्त 2011 को घोषित कर दिया गया था तो सरकार ने उस जिले में आज तक प्रशासनिक इकाइयों का गठन क्यों नहीं किया। उत्तराखंड सरकार जिले के नाम पर डीडीहाट के लोगों को बरगलाने का काम कर रही है।
जौहार जनजाति संगठन की महिलाओं ने भी आंदोलन में कूदने की बात कही। ग्राम प्रधान संगठन के जिला अध्यक्ष श्याम सुंदर सिंह सौन ने कहा कि सभी ग्राम प्रधान अपने गांवों के लोगों के साथ डीडीहाट जिले की मांग के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में कूदेंगे और जिला गठन न होने तक आंदोलन में बने रहेंगे। आंदोलन को धारचूला और मुनस्यारी के लोगों का भी व्यापक समर्थन मिलना शुरू हो गया है।
15 अगस्त 2011 में घोषणा होने के बाद भी अभी तक जिले को अस्तित्व में नहीं लाया गया है। जिले का गठन न होने से डीडीहाट आने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, जिसका सीधा असर टैक्सी व्यापार पर पड़ रहा हैं। - जीवन बोरा
डीडीहाट के विकास के लिए जिले का गठन होना अत्यंत आवश्यक है। जिले का गठन होने के बाद धारचूला, मुनस्यारी सहित कई ग्रामीण इलाकों से लोग रोजाना डीडीहाट पहुंचेंगे, जिससे टैक्सी कारोबारियों के आमदनी के साधन बढ़ जाएंगे। - नरेंद्र सिंह खोलिया
जिले का गठन न होने से डीडीहाट बाजार सूना हो गया है। कई टैक्सी मालिक रोड टैक्स तक जमा नहीं कर पा रहे हैं। टैक्सी की संख्या लगातार बढ़ रही है और पैसेंजर घट रहे हैं। डीडीहाट को जल्द जिला बनाया जाए। - खिल्लू भंडारी
डीडीहाट के जिला बनने के बाद आरटीओ जैसे महत्वपूर्ण विभाग जिले में खुलेंगे, जिसका सीधा फायदा टैक्सी मालिकों को होगा। अभी टैक्सी से संबधित आरटीओ कार्यालय के काम कराने में हम लोगों को कई दिन लग रहे हैं। - भास्कर सिंह
यूपी के समय चलती थीं तीन बसें, उत्तराखंड बनने के बाद सूना हो गया रोडवेज बस स्टेशन
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। उत्तर प्रदेश शासन काल में डीडीहाट से बरेली सहित अन्य शहरों के लिए संचालित बस सेवाएं उत्तराखंड राज्य बनने के बाद बंद हो गईं। सीधी बस सेवाओं के बंद होने से यहां के लोगों को यूपी जाने के लिए वाहन बदलने पड़ते हैं।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सभी लोगों में आस जगी थी कि अब उनको अच्छी सुविधाएं प्राप्त होंगी लेकिन राज्य गठन के बाद सुविधाएं बढ़ना तो दूर यूपी के समय मिलने वालीं सुविधाएं भी बंद हो गईं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण डीडीहाट है। उत्तर प्रदेश शासनकाल में डीडीहाट से जिला मुख्यालय के अलावा बरेली और टनकपुर के लिए बसें संचालित होती थीं। इसके लिए डीडीहाट में रोडवेज स्टेशन भी बना था।
इन बसों से सबसे अधिक फायदा सेना के जवानों को मिला करता था। डीडीहाट, धारचूला तहसील निवासी सेना के जवान ट्रेन पकड़ने के लिए इसी बस से बरेली या टनकपुर जाते थे। दिल्ली के लिए संचालित बस सेवा का लाभ डीडीहाट, ओगला, चरमा, जौरासी से लेकर पिथौरागढ़ तक के लोगों को मिलता था। उत्तराखंड गठन के बाद डीडीहाट- बरेली और डीडीहाट-टनकपुर रोडवेज बसों का संचालन बंद कर दिया गया।
2005 तक किसी तरह चली दिल्ली- डीडीहाट बस भी 2005 के बाद कभी रोडवेज स्टेशन नहीं आई। जनता की लगातार मांग के बाद चुनावी साल में जरूर सरकारों ने कुछ दिनों तक दिल्ली- डीडीहाट बस का संचालन किया लेकिन चुनाव खत्म होते ही डीडीहाट से बस सेवा भी बंद कर दी गई। अब डीडीहाट का रोडवेज स्टेशन मात्र स्टेशन बनकर रह गया है।
डीडीहाट से रोडवेज बस का संचालन कराने के लिये शीघ्र मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। डीडीहाट से टनकपुर और देहरादून के लिए रोडवेज बसों का संचालन कराया जाएगा। - बिशन सिंह चुफाल, कैबिनेट मंत्री एवं स्थानीय विधायक।