नाचनी (पिथौरागढ़)। पशु चारा संग्रह करते समय महिलाओं को मौत से चिंतित हिमालय ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट ने 10 वर्षों में पिथौरागढ़ के तीन विकासखंडों के 23 गांवों में 164 हेक्टेयर व्यक्तिगत नाप भूमि पर सदाबहार हरे चारे का उत्पादन कर सरकार को आइना दिखाया है। अब इन गांवों की महिलाएं हरे चारे के लिए जंगलों पर निर्भर नहीं हैं। इससे समय के साथ श्रम की भी बचत हो रही है। संबंधित महिलाएं इसे तोहफे जैसा मान रहीं हैं।
पहाड़ के गांवों में खेती के लिए पशुपालन भी जरूरी है। यह काम जंगलों पर ही निर्भर है। हर साल मवेशियों के लिए चारा संग्रह करने में पहाड़ियों से गिरने या हिंसक वन्यजीवों के हमले से कई महिलाओं की मौतें हो जाती हैं जबकि कई महिलाएं जिंदगी भर दिव्यांग हो जातीं हैं। ऐसी घटनाओं से चिंतित हिमालयन विकास समिति ने पशु चारा संग्रह की योजना बनाई।
महिलाओं की सुविधा के लिए वर्ष 2011 से 2020 तक मुनस्यारी के बरा, तल्ला भैंसकोट, कोट्यूडा, हुपुलि, धामी फल्याटी, भैंसखाल, रसियाबगड़, बेड़ीनाग के राईगड़स्यारी, गनोरा भुवनेश्वर, बेलाआगर, गंगोलीहाट के काकड़ा, ओलियागांव, चमटोला, भन्याड़ी, डसीलाखेत, पोखरी, चाख, टिमटा गांवों में नैपियर, औंस घास, भीमल आदि चारा पत्ती प्रजातियों के पौधे रोपे गए थे। इनका बेहतर परिणाम मिल रहा है। अब इन गांवों की महिलाओं को चारा पत्ती के लिए पेड़ और पहाड़ों में नहीं जाना पड़ रहा है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने बताया कि अब जिले के अन्य गांवों में भी ऐसे प्रयास किए जाएंगे।
दो माह में दो महिलाओं की मौत
पिछले साल 15 दिसंबर को घास काटते समय 700 मीटर ऊंचाई से चट्टान में गिरने से मलौन गांव के देरुखा तोक निवासी 67 वर्षीय कौशल्या देवी के शरीर के कई टुकड़े हो गए थे। इस कारण महिला का शरीर का कुछ ही हिस्सा मिल सका। इसी माह 16 जनवरी को हुई दूसरी घटना में बोरागांव के तोक टिमटिया की 38 वर्षीय विमला देवी की चारा काटने के दौरान 200 मीटर गहरी खाई में गिरकर मौत हो गई थी।