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108 सेवा जाम में फंसी

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ध्याड़ी में बोल्डरों की परवाह न कर नवजात को ले जाता 108 कर्मी। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बीच आपातकालीन 108 सेवा में तैनात कर्मचारी एक नवजात की जान बचाने के लिए देवदूत बन गए। इन लोगों ने पहाड़ी से गिर रहे मलबे की परवाह नहीं करते हुए एक माह की मासूम को गोद में लेकर उसे दूसरी एंबुलेंस में शिफ्ट करके हायर सेंटर भिजवाया, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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मुनस्यारी के ग्राम क्वीटी निवासी लता देवी पत्नी सुरेश की एक माह की बेटी सांस लेने में दिक्कत के बाद पिथौरागढ़ महिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर की गई थी। रात में हुई बारिश के बाद 108 सेवा हायर सेंटर नहीं जा सकी। 8:30 बजे एंबुलेंस हल्द्वानी के लिए निकली लेकिन इग्यारदेवी के पास जाम लगने के बाद चालक ने तोली के रास्ते एंबुलेंस को निकाला। वहां भी पनार और ध्याड़ी के पास भारी मलबा आने से यातायात बंद हो गया। ऐसे में एंबुलेंस कर्मियों ने अल्मोड़ा से दूसरी एंबुलेंस को बुलाया। पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण बीमा
र नवजात को कर्मियों ने जान पर खेलकर किसी तरह अल्मोड़ा से आई एंबुलेंस से हायर सेंटर भिजवाया। एंबुलेंस कर्मियों के इस कार्य की हर किसी ने सराहना की है।
एक माह पहले सीएचसी थल में हुई थी डिलीवरी
एक माह पूर्व सीएचसी थल में लता देवी की सामान्य डिलीवरी हुई थी, लेकिन बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उसे महिला अस्पताल लाए थे। बच्चे की स्थित में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर किया।
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108 कर्मी लोगों की सेवा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं। टीम ने साहस का परिचय देते हुए पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों से नवजात और उसकी मां को सुरक्षित निकालकर अल्मोड़ा एंबुलेंस से हायर सेंटर भिजवाया। - परमानंद पंत, डीपीओ पिथौरागढ़।
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