पिथौरागढ़। सरकार पहाड़ों पर विकास के दावे तो कई कर रही है लेकिन आज भी पहाड़ पर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास के लिए ग्रामीण परेशान हैं। इसके इतर सरकार पहाड़ों पर जगह-जगह शराब की दुकानें खोल रही है। ग्रामीणों का कहना कि वे लोग कई वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जिन पर सुनवाई नहीं हो रही है लेकिन बिना मांगें उनके गांवों और कस्बों में शराब की दुकान खोल रही है। शनिवार को जाजरदेवल मुख्य बाजार में शराब की दुकान खुलने के विरोध में नौ गांवों के लोगों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया।
कलक्ट्रेट पर गरजे महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने दोटूक कहा कि वे अपने क्षेत्र में शराब की दुकान नहीं खुलने देंगे। युवाओं को रोजगार और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए लेकिन सरकार उन्हें शराब बांटने की कोशिश कर रही है। गेठना, सुजई, उर्ग, ओड़माथा, सल्मोड़ा, सातसिलिंग, जीबी, घुनसेरागांव और मड़खड़ायत के ग्रामीणों ने कहा कि जिस जगह शराब की दुकान खोली जा रही है उससे सटे गांव उर्ग को सरकार ने संस्कृत गांव घोषित किया हुआ है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अपनी संस्कृति को बचाने की बात कर रही है, वहीं लोगों को शराब बांटकर उन्हें इससे दूर कर रही है।
प्रदर्शन में शामिल बुजुर्गों ने कहा कि क्षेत्र में अच्छे शिक्षण संस्थान खुलने चाहिए ताकि क्षेत्र के विद्यार्थी और युवा इनमें बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपना जीवन सफल बना सकें। युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए लेकिन सरकार उन्हें नशे के दलदल में धकेलने के लिए शराब की दुकान खोल रही है। ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी कीमत पर क्षेत्र में शराब की दुकान नहीं खुलने देंगे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जाजरदेवल में शराब की दुकान खोलने का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदाेलन किया जाएगा। उन्होंने शराब की दुकान खोलने पर हाईवे जाम करने की भी चेतावनी दी। प्रदर्शन करने वालों में मोहित जोशी, रेखा भट्ट, चंद्रा, राम सिंह, हरीश, दीपक जोशी, ललित, नितिन, एनएस बिष्ट, जितेंद्र आदि लोग शामिल रहे।