जोहार घाटी में कैमरे में कैद हुई कुमाऊं मीडो ब्लू तितली । स्रोत: जगदीश भट्ट
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के जोहार घाटी में खास तरह की तितली कुमाऊं मीडो ब्लू इठलाती दिखी है। यह तितली पहली बार वर्ष 1926 में मिलम गांव में दिखाई दी थी। इसके बाद यह 1917 में नजर आई थी।
पिथौरागढ़ वन विभाग, विंग्स फाउंडेशन और हिमालयन शैफर्ड की ओर से मुनस्यारी और बेड़ीनाग क्षेत्र में विभिन्न प्रजाति के तितलियों की खोज की जा रही है। प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि अभियान के तहत विशेष रूप से तितलियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। जिले में अब तक 225 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
विंग्स फाउंडेशन के जगदीश भट्ट ने बताया कि हाल ही में रिपोर्ट की गई कुमाऊं मीडो ब्लू तितली का आकार 30-35 मिलीमीटर है। यह जोहार घाटी में समुद्र तल से 3200 से 4200 मीटर ऊंचाई तक के क्षेत्र में पाई जाती है। बताया कि यह एक तरह का मॉडल जीव है, जो खास पारिस्थितिकी में पाया जाता है। संबंधित स्थान पर किसी भी प्रकार के पर्यावरणीय बदलाव होने पर ये विलुप्ति के कगार पर आ जाते हैं।
बृजेश धर्मशक्तू के अनुसार इस तरह के जीवों का वैज्ञानिक अध्ययन कर हम एक खास पारिस्थितिकी में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों का भी अध्ययन कर सकते हैं। हिमालयन शैफर्ड संस्था के चंदन कुमार का कहना है कि बटरफ्लाई काउंट जैसे आयोजन के चलते कुछ ऐसी प्रजातियों का भी पता चल सकता है जो क्षेत्र में विलुप्ति के कगार पर हों। अभियान में हेमंत धर्मशक्तू, मुकेश लस्पाल, हेमराज पांगती, दीपक धर्मशक्तू और पवन कोरंगा शामिल रहे।
अभियान चलाकर दी जा रही तितलियों के संबंध में जानकारी
विंग्स फाउंडेशन के जगदीश भट्ट ने बताया कि बटरफ्लाई काउंट- 7 सीजन के तहत विभिन्न स्थानों पर अभियान चलाकर तितलियों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। विद्यार्थियों के साथ ही वन रक्षक प्रशिक्षुओं के लिए भी तितलियों से संबंधित विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुनस्यारी स्थित इको पार्क में तितलियों की गणना के लिए अलग-अलग जैव विविधता और समुद्र तल से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाकर कार्य किया गया। संवाद