दारमा घाटी से पहली बार आदि कैलाश की यात्रा के लिए बुधवार को 13 यात्रियों का दल रवाना हुआ। यह दल मंगलवार की देर रात धारचुला पहुंचा था। दल के सदस्यों का समिति के महासचिव पूरन सिंह ग्वाल और रं कल्याण संस्था के पदाधिकारियों ने पारंपरिक वेषभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया।
मुक्तेश्वर में जाम में फंसने के कारण यात्री एक दिन विलंब से यहां पहुंचे। यात्रियों के धारचूला पहुंचने से पूर्व मिर्थी में डीआइजी निंबाडिया के नेतृत्व में सातवीं वाहिनी आईटीबीपी के जवानों ने स्वागत किया। डीआईजी ने कहा कि यात्रियों को समिति के प्रतिनिधि और उनके जवानों द्वारा सुरक्षा के साथ-साथ हर प्रकार का सहयोग दिया जाएगा। बिदांग के आगे सिंगला पास और ज्योलीकांग मार्ग में ग्लेशियर आने के कारण रास्ता बंद है। समिति के मुख्य महासचिव जगत सिंह दताल ने बताया कि दल में दिल्ली, यूपी, जयपुर, जोधपुर, कोलकाता, केरला और बंगलूरू के यात्री शामिल हैं। दल का दांतु में होम स्टे संचालक संजय दताल, महेश दताल के नेतृत्व में 10 पोर्टर, दो गाइड आशा बनग्याल, लक्ष्मण बनग्याल सहयोग करेंगे।
ये है रूट....
बुधवार को धारचुला से लगभग 70 किमी का सफर वाहनों से तय कर दुग्तु गांव पहुंचेगा। उसके बाद दो किमी पैदल यात्रा कर सदस्य पंचाचूली बेस कैंप पहुंचेंगे। रात्रि विश्राम दांतु गांव मेें।
बृहस्पतिवार को 12 किमी की पैदल यात्रा पूरी कर यात्री सीपू गांव में रात्रि विश्राम
सात जून को ढाकर या तिदांग में रात्रि विश्राम
आठ जून को 12 किमी चलने के बाद रामा होते हुए बिदांग पहुंच विश्राम
नौ जून को आदि कैलाश के बाद विष्णु कुंड और रामा कुंड के दर्शन करने के बाद रामा जगह पर रात्रि विश्राम होगा। दल यात्रा पूरी कर 10 जून को वापस धारचूला आएगा।
तीन बार कैलाश की यात्रा कर चुके हैं चैतन्य
आदि कैलाश यात्रा दल के टीम लीडर बंगलूरू निवासी चैतन्य कुमार तीन बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर चुके हैं। वे अपनी पत्नी नीलू शर्मा (42) बेटी हिमांशी और बेटे लावित्र के साथ पहली बार दारमा से आदि कैलाश की यात्रा कर रहे हैं। जयपुर के राजू व्यास (58) पत्नी चंदा के साथ पहली बार दारमा घाटी से यात्रा कर रहे हैं। राजू अब तक चार बार कैलाश की परिक्रमा भी कर चुके हैं। पिछले वर्ष भी उन्होंने मानसरोवर की परिक्रमा की।