झूलाघाट में काली नदी किनारे बने भवन। संवाद
पिथौरागढ़। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर झूलाघाट बाजार में काली नदी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए सुरक्षा कवच मिलेगा। नदी की तरफ बने व्यापारिक प्रतिष्ठानों और भवनों के नीचे 10 लाख की लागत से सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा। दीवार बनने से नदी से कटाव रुकेगा और स्थानीय व्यापारियों व लोगों को काली नदी के खौफ से मुक्ति मिलेगी।
भारत-नेपाल सीमा पर झूलाघाट कस्बा काली नदी के किनारे बसा है। हर साल मानसूनकाल में रौद्र रूप में बहने वाली काली नदी से बाजार के नीचे भू-कटाव होता है, जिससे हर समय खतरा बना रहता है। स्थानीय व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों का खौफ के साए में संचालन करने के लिए मजबूर होते हैं। वहीं, स्थानीय लोग अपने भवनों में चैन की नींद से नहीं सो पाते हैं।
नदी के उफान पर आने से रात के समय लोगों का घरों से बाहर निकलकर नदी की पहरेदारी करना आम बात है। अब व्यापारियों और स्थानीय लोगों को नदी के भू-कटाव से सुरक्षा मिलेगी। संवेदनशील स्थानों पर 10 लाख रुपये से नदी के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण होगा, जिसकी स्वीकृति मिल चुकी है। कार्यदायी संस्था जिला पंचायत जल्द ही दीवार का निर्माण कार्य शुरू कराएगी।
वर्ष 2013 में 24 से अधिक दुकानें समा गई थीं काली में
वर्ष 2013 के मानसूनकाल में काली नदी ने झूलाघाट में जमकर तबाही मचाई। तब नदी के उफान पर आने से भयानक भू-कटाव हुआ। 24 से अधिक दुकानें और मकान काली नदी में समा गए थे। व्यापारियों और स्थानीय लोगों को अपनी दुकानों और मकानों से हाथ धोना पड़ा। हवा में अटके कुछ मकानों को सुरक्षा की दृष्टि से गिरा दिया गया था।
कोट
झूलाघाट में काली नदी से कटाव को रोकने के लिए सुरक्षा दीवार लगेगी। इसकी स्वीकृति और इसके लिए धन मिल चुका है। जल्द ही सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू होगा। - बीसी छिमवाल, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, पिथौरागढ़