पिथौरागढ़ में चिकित्सा कैंप में मरीजों की जांच करते डा. महेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला फाउंडेशन और विवेकानंद हास्पिटल हल्द्वानी की ओर से नया बाजार सरस्वती शिशु मंदिर में लगाए गए चिकित्सा शिविर में हजारों लोग उमड़े। करीब ढाई हजार मरीजों का पंजीकरण हुआ। लोग सुबह सात बजे से ही पंजीकरण कराने पहुंच गए। सुबह नौ बजे से जैसे ही डॉक्टरों ने मरीजों का चेकअप शुरू किया तो भीड़ को नियंत्रित करना कठिन हो गया। विवेकानंद हास्पिटल के न्यूरो सर्जन डा. महेश शर्मा, हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप पांडे, बाल रोग विशेषज्ञ डा. बृजेश और कान रोग के विशेषज्ञ डा. विकल्प पंत ने मरीजों की जांच की।
शिशु मंदिर के कई कक्ष चिकित्सा शिविर के लिए खोले गए थे। पंजीकरण के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए। उसके बाद पर्ची डॉक्टर के पास भेजी गई। जिस मरीज का नाम पुकारा गया, वही डॉक्टर के कक्ष में भेजा गया, लेकिन उससे पहले ही कई लोग कक्ष में पहुंचे हुए थे। जिले में न्यूरो सर्जन न होने के कारण अधिकांश लोग अपनी समस्या बताने के लिए डॉक्टर के पास पहुंचे।
डा. महेश शर्मा इसी जिले के निवासी हैं और उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से ली थी। इस वर्ष शिशु मंदिर अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है। प्रधानाचार्य गगन सिंह बोरा ने कहा कि ऐसे अवसर पर अमर उजाला फाउंडेशन और विवेकानंद हास्पिटल ने चिकित्सा शिविर लगाकर आयोजन को गरिमा प्रदान की है। चिकित्सा शिविर के लिए लंबे समय से प्रचार किया गया था। इस कारण जिले के दूरदराज हिस्सों से भी मरीज यहां पहुंचे थे। स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिविर को सफल बनाने में ललित जोशी, निर्मल ऐर, हेम गड़कोटी, विनोद रावत, ललित अधिकारी, जनक जोशी के अलावा शिशु मंदिर के शिक्षकों ने सहयोग दिया। डॉक्टरों ने शिविर में पहुंचे सभी मरीजों की जांच की।
ज्यादातर मरीज सिरदर्द, कमर दर्द वाले
न्यूरो सर्जन डा. महेश शर्मा ने बताया कि चिकित्सा शिविर में ज्यादातर मरीज सिरदर्द, कमर दर्द, साइटिका जैसी बीमारियों से ग्रसित थे। उन्होंने कहा कि लोगों की जीवनशैली में आ रहे बदलाव के कारण यह समस्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लोगों का शारीरिक श्रम कम होते जा रहा है। खानपान का भी लोग ध्यान नहीं देते। उन्होंने कहा कि नियमित घूमना, व्यायाम से कई छोटी-मोटी बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है। डा. शर्मा ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के शिविर लगाए जाएंगे, ताकि यहां के लोगों को सुविधा मिल सके। इससे पहले उन्होंने झूलाघाट में भी चिकित्सा शिविर लगाया था।