पिथौरागढ़। बर्फबारी न होने से इस बार स्नो स्कीइंग प्रशिक्षण की किसी भी स्तर पर कोई तैयारी नहीं है, जबकि पिछले वर्षों तक मुनस्यारी के खलियाटॉप एवं बेटुलीधार में समय पर अच्छी बर्फबारी होने पर केएमवीएन और अन्य साहसिक खेलों से जुड़ी संस्थाएं स्कीइंग का प्रशिक्षण आयोजित करती आई हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका है।
केएमवीएन ने वर्ष 2017 में 17 से 23 जनवरी तक पहले चरण का स्कीइंग प्रशिक्षण आयोजित किया था। तब बेटुलीधार में ही इतनी ज्यादा बर्फ थी कि वहां पर आसानी से स्कीइंग का प्रशिक्षण संपन्न हो गया। इसके अलावा मोनाल संस्था ने खलियाटॉप में भी स्कीइंग प्रशिक्षण आयोजित किया था। केएमवीएन ने दूसरे चरण का स्कीइंग प्रशिक्षण पिछले साल 16 से 20 मार्च तक कराया था। पिछले साल मार्च में भी जमकर हिमपात हुआ था। केएमवीएन के साहसिक पर्यटन प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि इस बार मौसम प्रतिकूल होने के कारण स्कीइंग की कोई तैयारी शुरू नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि जब तक मुनस्यारी के खलियाटॉप और बेटुलीधार में जमकर बर्फ नहीं गिर जाती, स्कीइंग की तैयारी कर पाना संभव नहीं होगा। केएमवीएन ने सबसे पहले 1990 में बेटुलीधार में स्कीइंग का प्रशिक्षण शुरू किया था। उसके बाद बीच के कुछ वर्षों को छोड़कर हर साल स्कीइंग का प्रशिक्षण दिया गया। मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि खलियाटॉप में बर्फ नहीं है। इस बार उन्होंने व्यापक स्तर पर स्कीइंग कराने की सोची थी, लेकिन बर्फ न गिरने से तैयारी धरी रह गई है। उन्होंने कहा कि जब भी जमकर हिमपात होगा, स्कीइंग का प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाएगा।
तीन वर्ष कम बर्फ के कारण नहीं हुई स्कीइंग
केएमवीएन को 1997 से 1999 तक स्कीइंग का प्रशिक्षण स्थगित करना पड़ा था। तब बर्फ तो गिरी थी, लेकिन स्कीइंग के लायक बर्फ न होने के कारण यह आयोजन नहीं हो सके। निगम के साहसिक पर्यटन प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि स्कीइंग के लिए कम से कम दो फुट बर्फ होनी जरूरी है। इससे कम बर्फ पर स्कीइंग नहीं हो सकती।
पर्यटकों की संख्या में आई गिरावट
बर्फबारी न होने से इस बार पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। नववर्ष मनाने के लिए आने वाले पर्यटक बर्फबारी देखने की इच्छा से ही यहां पहुंचते हैं, लेकिन इस बार नववर्ष का स्वागत हिमपात से नहीं हो पाया। केएमवीएन के सभी आवासगृह इन दिनों खाली पड़े हैं। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया का कहना है कि यदि बर्फबारी हो जाती तो पर्यटकों का रुख पहाड़ों की तरफ बढ़ जाता।