धारचूला(पिथौरागढ़)।
नेपाल प्रशासन के ढुलमुल रवैये से इस साल छह महीने बाद अपने मूल गांवों को लौटने वाले उच्चस्तरीय क्षेत्रों के लोग धारचूला में ही फंस सकते हैं। भारतीय क्षेत्र में लखनपुर से नजंग तक रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण आवागमन बंद है। हालांकि, कुछ दिन पहले भारत और नेपाल के जिला स्तरीय अधिकारियों के बीच हुई बैठक में वैकल्पिक मार्ग बनाने पर सहमति हुई थी, लेकिन भारत और नेपाल के बीच कई स्थानों पर आवागमन के लिए स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए कच्चे पुलों की नेपाल पुलिस की कड़ी निगरानी से वैकल्पिक मार्ग का मामला खटाई में पड़ता दिख रहा है।
पिछले महीने लखनपुर में हुए भूस्खलन में पूरी पहाड़ी दरक गई है। इससे पैदल रास्ता ध्वस्त हो गया है। चीन सीमा लिपुपास के लिए जाने वाली सड़क का काम भी रुक गया है। इस पर जिला प्रशासन ने दार्चुला (नेपाल) के जिलाधिकारी के सामने वैकल्पिक रास्ते का मामला उठाया था। नेपाल प्रशासन ने इसमें सहयोग की बात कही थी। जिला प्रशासन ने नेपाल के सामने लखनपुर में भारत और नेपाल के बीच अस्थायी पुल बनाकर नेपाल पार से होकर नजंग तक जाने की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा था। नेपाल प्रशासन ने इस पर हामी भरी थी, लेकिन बात उससे आगे नहीं बढ़ी है।
नेपाल प्रशासन के ढुलमुल रवैये और नेपाली मीडिया में भारत विरोधी लेखों की भरमार से समस्या का हल होना असंभव लग रहा है। अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल, संरक्षक अशोक नबियाल, महासचिव देवकृष्ण फकलियाल, हरीश गुंज्याल, व्यास की प्रधान लक्ष्मी रायपा, पुष्पा देवी, गोपाल सिंह, गंगोत्री नपलच्याल, अर्चना गुंज्याल, सनम देवी गुलाब कुटियाल, कुशल नपलच्याल ने कहा नेपाल प्रशासन भारत और नेपाल के रोटी-बेटी के संबंधों का अपमान कर रहा है। एसडीएम आरके पांडे का कहना है कि प्रवास शुरू होने में काफी कम समय बचा है। वैकल्पिक पुल नहीं बने तो प्रवास पर जाने वाले लोग धारचूला में ही फंस सकते हैं। हर साल बर्फबारी के कारण अक्तूबर में उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोग पालतू जानवरों के साथ प्रवास पर निचले इलाकों में आ जाते हैं, जो अप्रैल से मूल गांवों को वापसी करते हैं।