पिथौरागढ़। उत्तराखंड शोध संस्थान की बैठक में पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे रामेश्वर मंदिर को भारनौल के मध्य क्षेत्र में बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।
इतिहासकार डॉ. मदन चंद्र भट्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यकारिणी का गठन करते हुए डॉ. भट्ट को अध्यक्ष, मुकुंद चंद भट्ट को उपाध्यक्ष, मोहन चंद्र भट्ट को महासचिव, एमएम भट्ट को सचिव, दिव्यदर्शन चौधरी को कोषाध्यक्ष, अधिवक्ता निर्मल चौधरी को विधि परामर्शदाता की जिम्मेदारी सौंपी गई।
डॉ. दीप चंद्र चौधरी, त्रिभुवन जोशी, केदार दत्त भट्ट, मुकेश भट्ट, चारू चंद्र जोशी, गिरीश दत्त भट्ट, रजनी जोशी, दर्शना भट्ट, सुभाष जोशी, कृष्ण चंद्र भट्ट को सदस्य बनाया गया। बैठक में प्रस्ताव पारित करते हुए भारत और नेपाल सरकार से मांग की गई की पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे रामेश्वर मंदिर को भारूड़ी के शौकापाट्टा में जसुली शौक्याण के अठमोली धर्मशाला से लेकर राजा विक्रम चंद की कृष्णभक्त पुत्रवधू द्वारा निर्मित भारनौल के मध्यवर्ती क्षेत्र में बनाया जाए।
पंचेश्वर मंदिर को बेलै गांव में बनाया जाए। इस गांव में वर्ष 1916 में सरयू और काली में आई बाढ़ में मंदिर के बहने के बाद कांसे का शिवलिंग रखा गया है। इसके अलावा जाखपंत के कटारमल मंदिर को तालेश्वर मंदिर के रूप में विकसित करने की भी मांग उठाई गई।