अस्कोट के रसगाड़ी गांव के बाशिंदों का सड़क के लिए चल रहा 53 साल का संघर्ष रंग लाया है। अब गांव में वर्ष 1965 से बंद सड़क का निर्माण शुरू हो चुका है। इससे गांव की नौ सौ की आबादी को आवाजाही में सहूलियत होगी।
अस्कोट के रसगाड़ी गांव में वर्ष 1965 में सड़क निर्माण को मंजूरी मिली भी, लेकिन टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच के एलायमेंट को देखते हुए सड़क निर्माण का काम रोक दिया गया। बंद सड़क को देखते हुए गांव की एक पीढ़ी गुजर गई, लेकिन सड़क एक इंच आगे नहीं खिसक पाई। ग्रामीण लगातार सड़क निर्माण की मांग उठाते रहे, इसे लेकर कई आंदोलन भी हुए। आखिरकार सड़क निर्माण को शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल गई। लोनिवि ने 50 लाख की लागत से एक किमी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। इसके आगे सड़क निर्माण का काम जारी है। इस सड़क के बनने से गांव की नौ सौ की आबादी को आवाजाही में सहूलियत होगी। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से विकास के रास्ते गांव में पहुंचेंगे। ग्राम प्रधान उमा बिष्ट और पूर्व प्रधान तारा सिंह का कहना है कि सड़क बनने से गांव में खुशहाली आएगी।
दूसरे गांवों को भी प्रेरित कर रही ग्रामीणों की जागरूकता
रसगाड़ी गांव के ग्रामीण नागरिक सुविधाओं के लिए खासे जागरूक हैं। यह ग्रामीणों की जागरूकता का ही नतीजा था कि केंद्र एवं राज्य सरकारों की मुहिम से पहले ही वर्ष 2010 में गांव ओडीएफ हो गया था। ग्रामीणों ने आठ साल पहले ही अपने घरों में शौचालय बना लिए थे। ग्रामीणों के मिले-जुले प्रयासों से गांव में सफाई की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण नौलों समेत पेयजल स्रोतों का संरक्षण भी कर रहे हैं। यह गांव शौचालय निर्माण और स्वच्छता में राज्य सरकार के हाथों पुरस्कृत हो चुका है। इससे आसपास के गांव भी शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित हुए और स्वच्छता अभियान में तेजी आई।