अस्कोट (पिथौरागढ़)। हर साल बरसात में सीमांत जिले में भूस्खलन से जानमाल, सड़कों, भवनों का नुकसान होना आम बात है। सरकार और प्रशासन क्षतिपूर्ति करने का हो-हल्ला खूब करता है, लेकिन जब नुकसान की भरपाई की बात आती है तो सरकारी महकमों को पर्याप्त धन नहीं मिल पाता। लोनिवि के अस्कोट डिवीजन जिसके पास कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के साथ ही विभिन्न मार्ग और पुलों की देखरेख का जिम्मा है। वर्ष 2016 की बरसात में इस डिवीजन की परिसंपत्ति को 23 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन शासन से केवल 1.15 करोड़ रुपये ही मिले।
अस्कोट लोनिवि डिवीजन के पास कैलास मानसरोवर पैदल मार्ग के साथ ही सीमांत के नौ मार्गों की देखरेख का जिम्मा है। इन मार्गों की कुल लंबाई 207 किमी है। 143 किमी लंबे 19 अन्य पैदल मार्ग भी डिवीजन की देखरेख में हैं। 72 किमी जिला मार्गों और 2.36 किमी आंतरिक मार्ग, 79 किमी लंबे 25 ग्रामीण मार्ग, 19 किमी लंबे पांच हल्के वाहन मार्गों की देखरेख का जिम्मा है। डिवीजन के पास 50 झूलापुल और छोटी पुलिया हैं। अस्कोट डिवीजन के अधिशासी अभियंता आनंद बल्लभ कांडपाल बताते हैं कि पिछले साल टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर फल्यांटीगाड़ पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। डामर, स्क्रबर, कॉजवे, दीवार क्षतिग्रस्त हुई थी। कनालीछीना-पीपली सड़क और ओगला-भागीचौरा-पस्मा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। दारमा और व्यास घाटी में कई लकड़ी की पुलिया बह गई थी। कम रकम मिलने के कारण इन मार्गों पर कामचलाऊ व्यवस्था की गई है।
ईई बताते हैं कि इस साल की बरसात में जौलजीबी-टनकपुर निर्माणाधीन मार्ग द्वालीसेरा, बगड़ीगांव में क्षतिग्रस्त हो गया है। आदि कैलाश पैदल मार्ग पर मेंहिकांग नाला और लिखर्चू में रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। अस्कोट-टनकपुर पैदल मार्ग, अस्कोट-कालापानी पैदल मार्ग के साथ ही अस्कोट-ख्वांकोट पैदल मार्ग, गुर्जीगाड़ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हुआ है। क्षतिपूर्ति के लिए अब तक 20 लाख रुपये मिले हैं। ईई कहते हैं कि पर्याप्त रकम मिल जाती तो नुकसान की भरपाई में आसानी होती।
मजदूरों की भर्ती न होने से दिक्कत
अस्कोट। बेलदार (मजदूर) लोक निर्माण विभाग की रीढ़ माने जाते हैं, लेकिन विभाग में वर्ष 1990 से इनकी भर्ती नहीं हो रही है। अस्कोट डिवीजन के पास वर्तमान में 97 बेलदार हैं। इनमें से 70 बेलदार 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। डिवीजन के 36 मजदूर कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लगे हैं।