फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फुटबाल के स्वर्णिम दिन लौटाना चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
फुटबाल के स्वर्णिम दिन लौटाना चुनौती
विज्ञापन

पिथौरागढ़। देश को कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय फुटबालर देने वाले पिथौरागढ़ के फुटबाल को फिर से वह स्वर्णिम दिन लौटाने के प्रयास हो रहे हैं। हालांकि, इन प्रयासों को मुकाम तक पहुंचाना जिले के खेल और फुटबाल से जुड़े सरकारी, गैर सरकारी संगठनों, समितियों के लिए कड़ी चुनौती है। पिथौरागढ़ के फुटबाल के स्वर्णिम इतिहास की बात करें तो यहां के खिलाड़ी देश के लिए तो खेले ही हैं, देश की फुटबाल टीम के कोच और देश के प्रतिष्ठित फुटबाल क्लब मोहन बागान जैसी टीमों का हिस्सा भी रह चुके हैं।

देश के प्रतिष्ठित फुटबालर आयरन वॉल ऑफ इंडिया त्रिलोक सिंह बसेड़ा की जन्मस्थली पिथौरागढ़ ने देश को कई महान फुटबालर दिए हैं, जिन्होंने देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इन्हीं में से एक थे, पुनेड़ी पिथौरागढ़ के जीवानंद पुनेड़ा। पिथौरागढ़ में 6 जुलाई 1934 को लोकमणि पंत के घर जन्मे स्वर्गीय जीवानंद ने फुटबाल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है। भारतीय सेना के सिपाही जीवानंद वर्ष 1955 से 1960 तक सेना की यूनिट टीम का हिस्सा रहे। वर्ष 1958 में ऑल इंडिया डुरंड कप फुटबाल प्रतियोगिता में सेना की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन करने पर तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया। जीवानंद देश के विख्यात फुटबाल क्लब मोहन बागान की ओर से सुब्रतो कप, संतोष ट्राफी के साथ ही कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेले। वह लंबे समय तक भारतीय सेना सर्विसेज की नेशनल टीम के कोच रहे।
विज्ञापन


एक मई 1970 को संपर्क मार्ग निवासी गोपाल सिंह रावल, मोहनी रावल के घर में भी जिले के महान फुटबालर ने जन्म लिया। पिथौरागढ़ के देवसिंह खेल मैदान में फुटबाल के गुर सीखने वाले संजय रावल 1996 से 1998 तक देश की प्रतिष्ठित फुटबाल टीम महेंद्रा एंड महेंद्रा के कप्तान रहे। वर्ष 1993-94 में इस होनहार फुटबालर का चयन राष्ट्रीय कैंप के लिए भी हुआ, लेकिन एक दुर्घटना में घायल होने से संजय नेशनल कैंप में शामिल नहीं हो पाए। जूनियर नेशनल खेलों में धूम मचाने वाले संजय महेंद्रा एंड महेंद्रा की ओर से डूरंड कप, डीसीएम कप, फेडरेशन कप, नेशनल लीक, आईएफए शील्ड आदि प्रतियोगिताओं में खेल चुके हैं।

डूरंड कप में स्वर्ण, फेडरेशन कप में रजत विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं। बकरकटिया चंडाक के भैरव दत्त का भी फुटबाल में कोई सानी नहीं था। 8 जून 1962 को हीरा बल्लभ के घर में जन्मे भैरव राष्ट्रीय फुटबाल टीम के कोच और मैनेजर रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 1979 में गुवाहाटी असम में स्कूल नेशनल फुटबाल प्रतियोगिता में भाग लिया। उसी साल दिल्ली में सुब्रतो कप में भैरव खेले। इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी को उत्तर प्रदेश सरकार से गौरव सम्मान प्राप्त हुआ था।

धपरपट्टा पिथौरागढ़ निवासी आनंद सिंह मल्ल 1976 से 78 तक राष्ट्रीय केमिकल फर्टिलाइजर से खेले। 1979 से 81 तक उन्होंने मफतलाल फुटबाल क्लब मुंबई की ओर से खेला। 1981 में मुंबई कस्टम के साथ जुड़े। 1980 और 81 में राष्ट्रीय टीम के साथ प्रशिक्षण लिया। वर्ष 1982 में एशियन गेम्स में प्रतिभाग किया। मुंबई कस्टम के लंबे समय तक कोच रहे। पपदेउ के हवलदार सुरेश लाल वर्मा, अनिल सिंह मतवाल, भुवन चंद्र पंत, विनोद सिंह वल्दिया, अक्षय दत्त, धीरेंद्र चौहान, मनोज पुनेठा, हेम चंद्र पुनेठा, प्रकाश चंद्र भट्ट समेत दर्जनों ऐसे नाम हैं, जिन्होंने फुटबाल के मामले में पिथौरागढ़ को देश, दुनिया में मान दिलाया।
विज्ञापन


फुटबाल की बेहतरी के लिए वर्ष 2011 से पिथौरागढ़ में अखिल भारतीय फुटबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को गढ़वाल हीरोज दिल्ली और पंजाब पुलिस जालंधर के बीच तीसरे ऑल इंडिया फुटबाल टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला खेला गया। खिलाड़ियों की जीवनी पर किताब लिख चुके राजेश मोहन उप्रेती कहते हैं बेहतर कोच और बेहतर मैदान फुटबाल को फिर बुलंदियों पर ले जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें