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लाइलाज नहीं है क्षय रोग:डॉ. गुंज्याल

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पिथौरागढ़/गंगोलीहाट। विश्व क्षय रोग दिवस पर जिला मुख्यालय में हुई गोष्ठी में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल ने कहा कि क्षय रोग लाइलाज नहीं है। इसके लिए लोगों को थोड़ी सजगता बरतनी होगी। गंगोलीहाट में गोष्ठी का आयोजन कर जागरूकता का संदेश दिया।
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क्षय नियंत्रण कार्यालय प्रांगण में हुई गोष्ठी में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरके जोशी ने कहा कि देशभर में करीब 28 लाख लोग टीबी से ग्रसित हैं। डॉ. जोशी ने कहा कि किसी को भी दो सप्ताह से अधिक की खांसी हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क बलगम जांच करा लेनी चाहिए।

डॉ. एचबी भट्ट, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर जितेंद्र सिंह मेहता ने भी विचार रखे। मुख्य चिकित्साधिकारी ने क्षय रोगियों को पुष्टाहार बांटा। जिला क्षय रोग अधिकारी ने फील्ड कर्मचारियों को टेबलेट फोन दिए। संचालन जिला कार्यक्रम समन्वयक विकास भंडारी ने किया।
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उधर, गंगोलीहाट में तहसील विधिक सेवा समिति ने टीबी दिवस पर गोष्ठी का आयोजन कर लोगों से जागरूक रहने की अपील की। तहसीलदार इंद्र सिंह मेहता, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कुंदन कुमार, डॉ. शंकर दत्त सूंठा, राजस्व उप निरीक्षक भगवती प्रसाद पंत, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर कौशलेश देउपा ने विचार रखे।

जिले में एक हजार हो सकती है क्षय रोगियों की संख्या
पिथौरागढ़। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरके जोशी ने बताया कि जिले में वर्तमान में 525 नए क्षय रोगी चिन्हित किए गए हैं। पांच गंभीर रोगियों का जिला क्षय रोग चिकित्सालय में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भी क्षय रोगियों को चिन्हित करने और रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश हैं। जिले में क्षय रोगियों की संख्या एक हजार के करीब हो सकती है। उन्होंने बताया कि क्षय रोगियों को घर-घर जाकर मुफ्त दवा उपलब्ध कराई जाती है, केवल गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया जाता है।

टीबी दिवस पर कच्चाहारी कुटी में हवन
पिथौरागढ़। टीबी दिवस पर कच्चाहारी कुटी में हवन किया गया। हवन के पश्चात हुई गोष्ठी में डॉ. गुरुकुलानंद कच्चाहारी ने कहा कि हवन के सानिध्य में रहने से टीबी ही नहीं, तनाव और उच्च रक्तचाप का भी उपचार होता है। उन्होंने बताया कि स्वयं उन्होंने हवन का प्रयोग कानपुर के टीबी आइसोलेशन अस्पताल में किया है, जहां प्रति माह आठ रोगियों की मृत्यु हो जाती थी। हवन शुरू करने के तीन माह बाद रोगियों की मृत्यु नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उनकी पहली नियुक्ति इसी अस्पताल में मेडिकल आफीसर के रूप में हुई थी। रोगियों को हवन के साथ-साथ शाकाहार भी दिया गया, जिससे मरीज ठीक होते चले गए। डॉ. तारा सिंह ने टीबी पर कविता पाठ किया। इस दौरान हीरा बल्लभ पांडेय, हरीश उप्रेेती, आशा मोहन, ललित बिष्ट, भावना धामी, गोपाल दत्त सती आदि मौजूद थे।
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