पिथौरागढ़। महाकाली में राफ्टिंग के लिए आए विदेशी पर्यटकों को मायूस होकर लौटना पड़ा है। प्रतिबंध को देखते हुए केएमवीएन ने पर्यटकों को महाकाली में राफ्टिंग कराने से हाथ खींच लिए हैं। साथ ही अपने साहसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी टाल दिए हैं। एसएसबी के प्रतिबंध के चलते जौलजीबी से लेकर झूलाघाट और पंचेश्वर से लेकर बूम तक साहसिक पर्यटन की गतिविधियां ठप हो गई हैं।
शनिवार को झूलाघाट से अमेरिका और इंग्लैंड के 14 सदस्यीय पर्यटकों का दल रानीखेत लौट गया है। उन्होंने सरयू आदि नदियों में राफ्टिंग की योजना बनाई है। इससे पहले उन्होंने एसएसबी के समक्ष वन विभाग का अनुमति पत्र पेश किया, लेकिन एसएसबी ने इसे अमान्य कहकर ठुकरा दिया।
वहीं, केंद्र के फरमान के बाद विदेश या गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना राफ्टिंग रोक रही एसएसबी के रुख को देखते हुए केएमवीएन ने भी हाथ खींच लिए हैं। नदी में राफ्टिंग की बुकिंग बंद कर दी गई हैं। वहीं, रोक को देखते हुए महाकाली में राफ्टिंग कराने वाली पर्यटन कंपनियां और साहसिक पर्यटन से जुड़े एनजीओ की गतिविधियां ठप हो गई हैं।
केएमवीएन ने शासन को लिखा पत्र
महाकाली में राफ्टिंग पर रोक के बाद केएमवीएन ने शासन को पत्र लिखा है। इसमें एसएसबी की रोक का हवाला देकर वस्तुस्थिति बताई है। क्षेत्र में पर्यटन पर प्रतिकूल असर की आशंका जताते हुए निस्तारण कराने की मांग उठाई है। केएमवीएन के जीएम टीसी मर्तोलिया ने बताया कि इस संबंध में मुख्यालय स्तर से उत्तराखंड शासन को पत्र लिखा जा रहा है।
प्रशासन ने एसएसबी से जानकारी मांगी
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने एसएसबी से प्रकरण से जुड़ी जानकारी मांगी है। राफ्टिंग पर रोक के आदेश की वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को कहा है। डीएम सी रविशंकर का कहना है कि एसएसबी से रोक के संबंध में पक्ष मांगा गया है। जिले में पर्यटन प्रभावित न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एसएसबी की रिपोर्ट मिलने के बाद ही अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
महाकाली में राफ्टिंग पर रोक के बाद साहसिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां ठप हो गई हैं। निगम ने राफ्टिंग के लिए पर्यटकों की बुकिंग लेनी बंद कर दी है। साहसिक पर्यटन के प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम भी आगे टाल दिए हैं। रोक से निगम की आय पर असर पड़ेगा। -दिनेश गुरुरानी, साहसिक प्रबंधक, पिथौरागढ़