जिले में इस बार 30 फीसदी हिस्से में बारिश न होने के कारण फसल नहीं बोई जा सकी। जितने हिस्से में फसल बोई गई वह उग नहीं पाई है। इस बार उत्पादन प्रभावित होने की चिंता तो है ही साथ ही एक बड़ा संकट यह भी खड़ा होने वाला है कि किसानों के पास बीज भी नहीं रहेगा।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अब बारिश होती भी है तो उसका कोई भी फायदा फसलों को मिलने वाला नहीं है। सूख चुकी फसल के फिर से हरा होने की उम्मीद नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र ने सूखे के कारण पैदा हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए अगले हफ्ते से सर्वे कराने का फैसला लिया है।
जिला प्रशासन ने भी कृषि विभाग, उद्यान विभाग और राजस्व विभाग के माध्यम से सर्वे कराने का फैसला लिया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि इस बार के मौसम ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। सबसे बड़ा असर गेहूं, मसूर की फसल पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों मुख्य फसलों के बीज का संकट हो सकता है। किसानों के पास अपने खाने के लिए तो अनाज संभव नहीं हो पाएगा लेकिन बीज के लिए भी पैदावार हो पाना संभव नहीं है। वह कहते हैं कि सूखे की इस स्थिति के दूरगामी असर सामने आएंगे। अगले सप्ताह से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम जिले में सूखे की स्थिति का सर्वे करेगी।
पौधरोपण पर असर पड़ेगा : डीएचओ
जिला उद्यान अधिकारी डा. मीनाक्षी जोशी का कहना है कि कम बारिश का असर पौधरोपण पर पड़ेगा। इस मौसम में अखरोट, नाशपाती के पौधों का रोपण होता है। नमी न होने से पौध रोपण कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। इसी तरह सब्जियों के पौध इसी समय तैयार किए जाते हैं। उनके लिए भी पानी की जरूरत होगी। बारिश न होने से सब्जियों और फलों की आगामी फसल प्रभावित होगी। फल पौधों में फूल टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग अपने स्तर से भी सर्वे करा रहा है।