झूलाघाट-पिथौरागढ़ रोड पर बड़ालू बाजार में स्वरोजगार योजना के तहत अवस्थापना मद से 15 लाख रुपये की लागत से तैयार सरस बाजार का छह साल में भी कोई उपयोग नहीं हुआ है। वर्ष 2010 में तैयार इस सरस बाजार की दुकानें अब तक किसी भी काश्तकार को आवंटित नहीं हुई हैं। लोग इसे सरासर सरकारी धन का दुरुपयोग मान रहे हैं। अब क्षेत्र के लोगों ने इस मामले में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रशासन से यह जानना चाहा है कि 15 लाख रुपये खर्च करने का औचित्य क्या था।
विकासखंड मूनाकोट से 2010 में स्वरोजगार योजना के तहत इस सरस बाजार का निर्माण कराया था। इसमें आठ दुकानें तैयार की गई। इतने वर्षों में भी सरस बाजार की दुकान किसी भी काश्तकार या उत्पादक आवंटित नहीं हुई है। बड़ालू निवासी आरटीआई कार्यकर्ता महेश जोशी ने बताया कि यह सरासर धन का दुरुपयोग है। उन्होंने विभाग से आरटीआई के तहत इस सरस बाजार को तैयार करने के औचित्य की जानकारी मांगी है।
सरस बाजार का यह है मकसद
महिला समूहों की ओर से उत्पादित सामग्री को बाजार उपलब्ध कराना,
ग्रामीणों को उत्पादों की उचित कीमत दिलाना तथा प्रोत्साहित करना,
ग्रामीण स्तर पर स्थानीय उत्पादों के जरिए रोजगार पैदा करना,
उत्पादों की बिक्री के लिए भटकने के बजाए एक स्थान पर बाजार तैयार करना।
डीएम ने कहा जल्दी उपयोग में लाएंगे
झूलाघाट। डीएम एचसी सेमवाल ने कहा है कि सरस बाजार को जल्दी उपयोग में लाएंगे। यदि इसकी मरम्मत की जरूरत होगी तो वह भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मूनाकोट के बीडीओं को इसके निर्देश जारी कर दिए गए हैं।