पिथौरागढ़। नगरपालिका में शामिल धनौड़ा, नेड़ा और बस्ते ग्राम पंचायत के लोग एक वर्ष से विकास के लिए तरसे हैं। इन तीनों गांवों को मिलाकर धनौड़ा वार्ड बनाया गया है। हालांकि, अब भी लोग मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जूझ रहे हैं। लोगों का कहना है कि पालिका में शामिल धनौड़ा वार्ड को विकास की दरकार है।
तीनों गांवों के विरोध के बावजूद इन्हें पालिका में शामिल किया गया है। पूर्व में ग्राम पंचायतों में विकास के लिए धनराशि आती थी। इस धनराशि से रास्ते, नालियां आदि कार्य किए जाते थे। पालिका में शामिल होने के बाद तीनों गांवों और इसकी कालोनियों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। धनौड़ा वार्ड में करीब 2800 मतदाता हैं। इन गांवों का ऊपरी क्षेत्र जंगल से लगा है। रात में तेंदुए का आतंक रहता है।
स्थानीय निवासी और व्यापार संघ के सचिव दिनेश कापड़ी का कहना है कि एक वर्ष से तीनों गांवों के लोग पालिका में शामिल होने का दंश झेल रहे हैं। गांवों के साथ नई कालोनियां बसी हैं, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं हैं। कहा कि क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट, सीवर लाइन, नालियां, रास्ते, कूड़ा निस्तारण की विकट समस्या है।
सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कलौनी का कहना है कि कुछ स्थानों पर निजी प्रयासों से स्ट्रीट लाइट लगवाई गई। वार्ड में मुख्य चुनौती रास्तों से अतिक्रमण हटाने की है। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के लिए दो पल सुकून के बिताने के लिए पार्क आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।
यक्षवती नदी को पुनर्जीवित करने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है। शहर के धारचूला रोड, लिंठ्यूड़ा आदि जगह की गंदगी सीधे रई गाड़ में जाती है। इसके ट्रीटमेंट के उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पालिका में शामिल होने के बाद लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं।