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काम के बोझ से हांफ रहे तहसील के अधिकारी

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पिथौरागढ़। कार्मिकों की कमी के चलते तहसीलों का प्रशासनिक ढांचा चरमरा रहा है। अधिकारी काम के बोझ से हांफ रहे हैं। जनता तहसीलों में बार-बार चक्कर काटने को मजबूर है। आलम यह है कि 13 प्रशासनिक इकाईयों वाले जिले में महज एक तहसीलदार और तीन नायाब तहसीलदार हैं। इन अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर तहसीलों का काम चलाया जा रहा है, जबकि कुछ तहसीलों का बोझ बड़े बाबू के कंधों पर है।
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जिले में 12 तहसील और एक उपतहसील हैं। यहां सिर्फ पिथौरागढ़ तहसील में ही स्थायी तहसीलदार राधेश्याम राणा हैं। नायाब तहसीलदार इंद्र सिंह मेहता गंगोलीहाट के प्रभारी तहसीलदार के साथ ही गणाईगंगोली का भी अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। इसी तरह नायाब तहसीलदार रघुवर सिंह बेड़ीनाग के प्रभारी के साथ ही तहसील थल और उप तहसील पांखू का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। इसके अलावा मुनस्यारी के न्यायिक कार्यों के लिए सप्ताह में दो दिन देने पड़ते हैं।

नायाब तहसीलदार ललित मोहन तिवाड़ी धारचूला तहसील के प्रभारी के साथ ही बंगापानी तहसील का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। उन्हें भी सप्ताह में दो दिन डीडीहाट के न्यायिक कार्यों के लिए देने पड़ते हैं। मुनस्यारी की तहसील मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के भरोसे चल रही है। इसी तरह देवलथल तहसील वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले है। तेजम में भी बाबू तहसील चला रहे हैं। अधिकारियों की कमी से काम का बोझ तो पड़ ही रहा है, आम जन को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में डीएम सी रविशंकर का कहना है कि शासन को कार्मिकों की कमी से अवगत करा दिया है।
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