मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। डीएम सी रविशंकर ने सरमोली गांव में जनजातीय उपयोजना के तहत रेनबो ट्राउट (मछली) और बीज उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया।
डीएम ने कहा कि मछली की इस प्रजाति को लोगों की आजीविका के साथ जोड़कर अच्छा कार्य किया है। ट्राउट मछली का उत्पादन होने पर यहीं पर उसकी खपत हो सकती है। इसके लिए यहां के लोगों को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी से बीएडीपी में केवल खड़ंजे, पुलिया के ही प्रस्ताव आते हैं, जबकि बीएडीपी से इस तरह की योजना में सहायता दी जा सकती है। कहा कि यदि ट्राउट मछली पालन के लिए उनके पास कोई ठोस प्रस्ताव आता है तो सहायता दी जाएगी।
संस्थान के निदेशक देवाशीष शर्मा ने बताया कि ट्राउट मछली उत्पादन का मुख्य उद्देश्य लोगों की आर्थिक स्थिति को बदलना है। बताया गया कि ट्राउट मछली का उत्पादन 17 डिग्री से नीचे के तापमान में होता है। इसका वजन एक साल में 300 से 500 ग्राम तक होता है। एक टैंक में 1200 मछली पैदा की जा सकती है। सरमोली में 16 लाख की लागत से मछली के 6 टैंक बनाए गए हैं। वैज्ञानिक आरएस पतियाल ने बताया कि दिल्ली में ट्राउट मछली लगभग पंद्रह सौ रुपये प्रति किलो बिकती है। कहा कि सबसे पहले सरमोली के किसान भूपेश पांगती ने रेनबो ट्राउट मछली पालन किया है।
पर्यटन व्यवसायी प्रशांत बिष्ट ने बताया कि पंचेश्वर कैंप में मछली पकड़कर फोटो खिंचाकर छोड़ने के ही पर्यटक चौदह हजार रुपये तक देते हैं। इस दौरान वैज्ञानिक एनएन पांडेय, भूपेश पांगती, महेश रावत, नेहा पांगती, तारा पांगती, श्रीराम धर्मशक्तू, डॉ. जनार्दन पांगती आदि मौजूद थे।