पिथौरागढ़। घंटाकरण के शिव मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित तुलसी विवाह कार्यक्रम में कई महिलाएं शामिल हुईं। जुलाई में हरिशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधों का रोपण किया जाता है और नवंबर में हरिबोधनी एकादशी के दिन तुलसी के इन पौधों का प्रतीकात्मक विवाह करने के बाद पूजन किया जाता है। हरिशयनी एकादशी से लेकर हरिबोधनी एकादशी तक वैवाहिक कार्यक्रम स्थगित रहते हैं। हरिबोधनी एकादशी से वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाती है।
घंटाकरण मंदिर में पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने विधिवत पूजा-अर्चना कराई। उन्होंने कहा कि तुलसी के पौधे का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। इस औषधीय महत्व के पौधे को घर के आंगन में जरूर लगाना चाहिए। तुलसी विवाह के साथ जुड़ी धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन प्रतीक रूप में भगवान कृष्ण और राधा का विवाह किया जाता है।
तुलसी के पौधों का पूजन करने के बाद उनमें वस्त्र, फल चढ़ाए गए। महिलाओं ने सामूहिक रूप से आरती की। तुलसी विवाह के कार्यक्रम घरों में भी किए गए। करीब चार महीने तक तुलसी के पौधों को घर के पास किसी गमले में उगाने और उन्हें बड़ा करने के बाद विवाह की परंपरा रही है।