फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरा रूप देख के चंद्रमा शर्मा गया अरु....

विज्ञापन
विज्ञापन
पिथौरागढ़/गंगोलीहाट। वड्डा की रामलीला में सूर्पणखा के नाक-कान काटने से सीताहरण तक की लीला हुई। बिषाड़ की रामलीला में राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के विवाह से लेकर कैकेई के कोपभवन में जाने तक की लीला हुई। गंगोलीहाट की रामलीला राम राज्याभिषेक साथ संपन्न हो गई है।
विज्ञापन


वड्डा की रामलीला में पंचवटी में घूम रही सूर्पणखा भगवान राम पर मोहित होकर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है। कहती है-मेरा रूप देख के चंद्रमा शर्मा गया अरु छुप गया, मोपे इंद्र मोहित हो गया, मुझे देख ऋषियन तप गया, पर क्या करूं हे रामचंद्र तुम पे मेरा दिल आ गया। भगवान राम स्वयं को विवाहित और लक्ष्मण को कुमार (युवा) बताते हुए सूर्पणखा को लक्ष्मण के पास भेज देते हैं।

लक्ष्मण विवाह से इनकार करते हैं। दोनों के इनकार के बाद सूर्पणखा सीता माता को डराने लगती है। भगवान राम के इशारे पर शेषावतार लक्ष्मण सूर्पणखा के नाक-कान काट देते हैं। सूर्पणखा के नाक, कान कटने के बाद लड़ने पहुंचे खर-दूषण सेना सहित मारे जाते हैं। रावण सीता का हरण कर लेता है। बिषाड़ की रामलीला में कोपभवन में बैठी कैकेई को समझाने का राजा दशरथ बहुत प्रयत्न करते हैं, लेकिन कैकेई एक नहीं सुनती। राजा दशरथ को राम को वनवास देना पड़ता है। दशरथ-राम, राम-सीता, राम-कौशल्या के बीच संवाद होता है।
विज्ञापन


गंगोलीहाट की रामलीला के समापन पर महाकाली मंदिर परिसर से लोनिवि गेस्टहाउस तक भव्य झांकी निकाली गई। जान्हवी नौले स्थित परंपरागत भरत-राम मिलाप स्थल पर समापन की लीला हुई। राम राज्याभिषेक का सुंदर मंचन किया गया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आरपी साह ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें